झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हजारों अभ्यर्थियों और नौकरी कर रहे अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से JPSC की कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार ने हाल में 36 परीक्षाएं रद्द और 6 परीक्षाएं स्थगित करने का निर्णय लिया था। इसके बाद इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त हुए 2300 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन नियुक्तियों पर तत्काल खतरा टल गया है। अदालत ने सरकार से 15 दिनों में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई रोक
झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अपना पक्ष रखा।
अदालत ने सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। इससे उन अभ्यर्थियों और अधिकारियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति इन परीक्षाओं के आधार पर हुई थी।
2300 से ज्यादा नौकरियों पर मंडरा रहा था खतरा
दरअसल, JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन शुरू किया था। यह आंदोलन करीब 26 दिनों तक चला। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों के बाद सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला किया था।
सरकार ने 36 परीक्षाओं को रद्द करने और 6 को स्थगित करने का निर्णय लिया। इससे पहले भी सरकार की ओर से 22 परीक्षाएं रद्द करने और 23 परीक्षाओं की CID जांच कराने की घोषणा की गई थी। इसी दौरान भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का फैसला हुआ था।
परीक्षा सुधार समिति भी देगी रिपोर्ट
सरकार ने JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए बनाई गई समिति को दो महीने में रिपोर्ट देने का समय दिया है। समिति परीक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों और सुधार के उपायों पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
सरकार ने JSSC संयुक्त स्नातक स्तर (CGL) परीक्षा को भी रद्द करने की घोषणा की थी। इसके अलावा आउटसोर्स एजेंसी TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं और उसके जारी किए गए परिणामों को भी रद्द करने का फैसला लिया गया था।
अब हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली कार्रवाई सरकार के जवाब और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगी।
