Saturday, September 12, 2026
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INS निपुण से गहरे समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत, 80% स्वदेशी तकनीक से लैस इस जहाज की ये हैं खासियतें

by Sagar Sharma
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INS निपुण क्या है और क्यों है खास?

भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में INS निपुण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह निस्तार-क्लास का डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है, जिसे गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के भीतर खोज-बचाव और पनडुब्बी बचाव जैसे बेहद जटिल अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम ने बनाया है और 31 अगस्त 2026 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया

इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वदेशीकरण है। इसमें करीब 75 से 80 फीसदी तक स्वदेशी कल-पुर्जों और प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। यह भारत की बढ़ती घरेलू जहाज निर्माण और रक्षा तकनीक क्षमता को दर्शाता है

118 मीटर लंबा है INS निपुण

INS निपुण करीब 118 मीटर लंबा है और इसका डिस्प्लेसमेंट 8,560 टन से ज्यादा बताया गया है। इसका आकार इसे समुद्र में लंबे समय तक जटिल अभियानों को अंजाम देने के लिए जरूरी स्थिरता और पर्याप्त पेलोड क्षमता देता है।

यह कोई पारंपरिक युद्धपोत नहीं है, जिस पर मुख्य रूप से मिसाइल या तोपें तैनात हों। इसकी असली ताकत पानी के नीचे होने वाले अभियानों में है। यानी किसी पनडुब्बी के दुर्घटनाग्रस्त होने, समुद्र की गहराई में किसी संरचना की जांच करने या बचाव अभियान चलाने की स्थिति में यह बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सैचुरेशन डाइविंग से गहराई में लंबे ऑपरेशन

INS निपुण की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम शामिल है। गहरे समुद्र में गोताखोरों के शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। बार-बार गहराई से सतह पर आने-जाने से डीकंप्रेशन सिकनेस का खतरा भी रहता है।

सैचुरेशन डाइविंग तकनीक में गोताखोरों को विशेष दबावयुक्त वातावरण में रखा जाता है, जिससे वे लंबे समय तक गहराई में काम कर सकते हैं। निपुण में इसके लिए आधुनिक सिस्टम और हीलियम-ऑक्सीजन मिश्रित गैस की सुविधा भी मौजूद है।

पनडुब्बी हादसे में बनेगा ‘मदर शिप’

INS निपुण की एक और बड़ी भूमिका Deep Submergence Rescue Vehicle (DSRV) के लिए मदर शिप की होगी। यदि समुद्र के नीचे किसी भारतीय पनडुब्बी के साथ हादसा होता है और उसमें नौसैनिक फंस जाते हैं, तो DSRV को निपुण से ऑपरेट कर बचाव अभियान चलाया जा सकता है।

इसके अलावा जहाज में Remotely Operated Vehicles (ROVs) का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ये रोबोटिक सिस्टम उन गहराइयों में जाकर काम कर सकते हैं जहां इंसानों के लिए सीधे जाना जोखिम भरा होता है।

समुद्र में एक जगह स्थिर रह सकता है

गहरे समुद्र में बचाव अभियान के दौरान जहाज का अपनी जगह पर स्थिर रहना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए INS निपुण में डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम दिया गया है। सेंसर, नेविगेशन सिस्टम और थ्रस्टर्स की मदद से जहाज समुद्री लहरों और हवा के बावजूद अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

मेडिकल सुविधा और हेलीकॉप्टर डेक भी मौजूद

बचाव अभियान के दौरान घायल नौसैनिकों को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने के लिए निपुण में आठ बेड वाला अस्पताल, ICU, ऑपरेशन थिएटर और टेलीमेडिसिन सुविधा मौजूद है। इसके अलावा जहाज पर हेलीकॉप्टर डेक भी है, जिसका इस्तेमाल खोज-बचाव और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसे अभियानों में किया जा सकता

हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी

INS निपुण का महत्व केवल भारतीय नौसेना तक सीमित नहीं है। भारत की समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी भूमिका के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है। INS निस्तार के बाद निपुण के शामिल होने से भारत के पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री तटों पर डाइविंग और सबमरीन रेस्क्यू क्षमता मजबूत होगी।

भारत हिंद महासागर क्षेत्र में आपदा या समुद्री दुर्घटना की स्थिति में तेजी से सहायता पहुंचाने की क्षमता भी मजबूत कर रहा है। ऐसे में INS निपुण भारत को एक विश्वसनीय फर्स्ट रिस्पॉन्डर के तौर पर अपनी भूमिका बढ़ाने में मदद कर सकता है। साथ ही यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में भी एक अहम कदम है।

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