Saturday, September 12, 2026
Saturday, September 12, 2026
Home खेलक्या विश्व कप में बदलेगी भारतीय महिला हॉकी की किस्मत? इन खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें

क्या विश्व कप में बदलेगी भारतीय महिला हॉकी की किस्मत? इन खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें

by Sagar Sharma
0 comments

भारतीय महिला हॉकी टीम इस बार एफआईएच महिला विश्व कप में नई उम्मीद और आत्मविश्वास के साथ उतरने जा रही है। टीम की कप्तान सलीमा टेटे को भरोसा है कि भारत इस बार अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर पदक की दौड़ में जगह बना सकता है। बेल्जियम और नीदरलैंड में होने वाले विश्व कप से पहले टीम नेशंस कप जीतकर अपने इरादे साफ कर चुकी है। अब नजर इस बात पर है कि क्या भारत पहली बार विश्व कप के पोडियम तक पहुंच पाएगा।

शोर्ड मारिन की वापसी से बढ़ी उम्मीद

भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा बदलाव डच कोच शोर्ड मारिन की वापसी है। उनकी मौजूदगी में भारत ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया था। अब एक बार फिर मारिन की कोचिंग में टीम बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है।

मारिन के लौटने के बाद भारत ने पहले हैदराबाद में विश्व कप क्वालिफिकेशन जीता और फिर जून में नेशंस कप का खिताब अपने नाम किया। फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 2-0 से हराया। इस जीत से टीम को एफआईएच प्रो लीग में भी वापसी का मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज में भी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

ग्रुप डी में कठिन चुनौती

भारत को विश्व कप के ग्रुप डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है। एफआईएच रैंकिंग में भारत नौवें स्थान पर है, जबकि चीन चौथे और इंग्लैंड सातवें नंबर पर हैं। दक्षिण अफ्रीका 18वें स्थान पर है।

ग्रुप चरण में भारत को शुरुआती मुकाबलों में कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। अगर टीम अगले चरण में पहुंचती है तो नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से सामना हो सकता है। ऐसे में भारत के लिए हर मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।

सविता पूनिया पर बड़ी जिम्मेदारी

गोलकीपर सविता पूनिया टीम की अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। टोक्यो ओलंपिक में भारत के ऐतिहासिक चौथे स्थान में उनके शानदार गोलकीपिंग प्रदर्शन की बड़ी भूमिका रही थी। यह उनका तीसरा विश्व कप है और वह अब तक 313 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुकी हैं।

हालांकि कुछ समय टीम से दूर रहने के बाद उनकी वापसी हुई है। उनकी गैरमौजूदगी में बिचू देवी खारीबम ने भी अच्छा अनुभव हासिल किया है। 25 वर्षीय बिचू देवी अब तक 65 मैच खेल चुकी हैं। ऐसे में गोलकीपिंग में भारत के पास दो मजबूत विकल्प मौजूद हैं।

दीपिका सेहरावत बन सकती हैं ट्रंप कार्ड

पेनल्टी कॉर्नर आधुनिक हॉकी में बेहद महत्वपूर्ण हथियार है और भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में सुधार की कोशिश कर रहा है। ड्रैग फ्लिकर दीपिका सेहरावत ने नेशंस कप में शानदार प्रदर्शन कर उम्मीद बढ़ा दी है।

हैमस्ट्रिंग चोट से वापसी के बाद दीपिका ने पांच मैचों में छह गोल किए और टूर्नामेंट की संयुक्त रूप से शीर्ष स्कोरर रहीं। डच पेनल्टी कॉर्नर कोच तइके तेकिमा के मार्गदर्शन में उनकी तकनीक में भी सुधार हुआ है। विश्व कप में उनकी भूमिका भारत के लिए निर्णायक हो सकती है।

सलीमा, नवनीत और लालरेमसियामी पर नजर

कप्तान सलीमा टेटे के अलावा नवनीत कौर और लालरेमसियामी हमारजोते भारतीय टीम के अहम खिलाड़ी हैं। नवनीत को उनकी गोल करने की क्षमता के कारण भारत की गोल मशीन भी कहा जाता है। वह डिफेंस को चकमा देने के साथ जरूरत पड़ने पर पेनल्टी कॉर्नर भी ले सकती हैं।

लालरेमसियामी अपनी तेज रफ्तार और समझदारी भरे खेल के लिए जानी जाती हैं। वह आक्रमण तैयार करने के साथ जरूरत पड़ने पर डिफेंस में भी योगदान दे सकती हैं।

इतिहास बदलने का मौका

भारतीय महिला टीम का विश्व कप इतिहास बहुत शानदार नहीं रहा है। 1974 में पहले ही विश्व कप में भारत चौथे स्थान पर रहा था, लेकिन उसके बाद टीम उस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सकी। अब तक आयोजित 15 विश्व कप में भारत ने सिर्फ आठ में हिस्सा लिया है। 2018 में टीम टॉप-8 में पहुंची थी, जबकि कई अन्य संस्करणों में उसे निचले स्थानों पर संतोष करना पड़ा।

इस बार नेशंस कप की जीत, शोर्ड मारिन की वापसी और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं का मिश्रण भारत की उम्मीदें बढ़ा रहा है। अब असली परीक्षा विश्व कप के मैदान पर होगी, जहां टीम के पास इतिहास बदलने का बड़ा मौका है।

Author

You may also like