22 अक्टूबर 2026: भारत में कारों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने मोटर वाहन सुरक्षा मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव अधिसूचित किए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने फ्रंटल क्रैश टेस्ट, साइड इम्पैक्ट, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना के बाद यात्रियों को बचाने से जुड़े नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का कार्यक्रम तय किया है। नए मानकों का उद्देश्य दुर्घटना के समय कार में बैठे लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ पैदल यात्रियों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को भी बेहतर संरक्षण देना है।
अक्टूबर 2027 से क्या बदलेगा?
सरकार की अधिसूचना के अनुसार, फ्रंटल ऑफसेट टक्कर और साइड इम्पैक्ट से यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े संशोधित मानक 1 अक्टूबर 2027 से नए कार मॉडलों पर लागू होंगे। इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से सभी संबंधित मॉडलों को इन मानकों का पालन करना होगा।फ्रंटल ऑफसेट क्रैश टेस्ट में कार के सामने के एक हिस्से को बाधा से टकराकर यह जांचा जाता है कि टक्कर के दौरान वाहन की संरचना और अंदर बैठे लोगों को कितनी सुरक्षा मिलती है। साइड इम्पैक्ट टेस्ट में यह देखा जाता है कि दूसरी गाड़ी या किसी अन्य वस्तु की तरफ से टक्कर होने पर कार यात्रियों को कितना सुरक्षित रखती है।
इन परीक्षणों का उद्देश्य केवल एयरबैग की मौजूदगी जांचना नहीं, बल्कि कार की बॉडी, सुरक्षा बेल्ट और अन्य सुरक्षा प्रणालियों के समग्र प्रदर्शन का मूल्यांकन करना भी है
पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
नई व्यवस्था में कार से टक्कर होने पर पैदल यात्रियों और अन्य कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं को लगने वाली चोटों को कम करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। संशोधित पैदल यात्री सुरक्षा मानक नए मॉडलों के लिए 1 अक्टूबर 2028 से लागू होने हैं।
इसके अतिरिक्त, पैदल यात्रियों के पैरों पर संभावित चोटों का आकलन करने के लिए उन्नत परीक्षण उपकरण FlexPLI के इस्तेमाल की समयसीमा 1 अक्टूबर 2032 निर्धारित की गई है। इससे कार के अगले हिस्से के डिजाइन और टक्कर के दौरान चोट के जोखिम का ज्यादा प्रभावी आकलन करने में मदद मिलेगी।
दुर्घटना के बाद भी सुरक्षा: 2029 से लागू होंगे नए प्रावधान
सरकार ने दुर्घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों में भी बदलाव किए हैं। पीछे से टक्कर होने पर ईंधन प्रणाली और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की सुरक्षा से संबंधित संशोधित आवश्यकताएं 1 अप्रैल 2029 तक सभी संबंधित मॉडलों पर लागू होनी हैं।
इसके अलावा, सीट बेल्ट और एयरबैग जैसे सुरक्षा उपकरणों से जुड़े रेस्ट्रेंट सिस्टम के नए मानक 1 अक्टूबर 2029 से नए मॉडलों और 1 अक्टूबर 2031 से सभी संबंधित मॉडलों पर लागू होंगे।
कार में Event Data Recorder (EDR) से जुड़े वाहन-अनुमोदन प्रावधान भी 1 अक्टूबर 2029 से प्रभावी होंगे। यह उपकरण दुर्घटना से संबंधित वाहन के कुछ आंकड़े रिकॉर्ड करता है, जिससे हादसे की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।
चोरी रोकने और ड्राइवर सुरक्षा पर भी ध्यान
नए नियमों में कार चोरी रोकने वाले इम्मोबिलाइजर को भी शामिल किया गया है। संबंधित यात्री वाहनों में 1 अक्टूबर 2027 से इसे अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। इम्मोबिलाइजर ऐसी तकनीक है, जो अधिकृत चाबी या सिस्टम के बिना इंजन चालू होने से रोकने में मदद करती है।
वहीं, ब्रेक और एक्सीलरेटर जैसे फुट कंट्रोल की व्यवस्था और संचालन से जुड़े संशोधित मानक नए मॉडलों पर 1 अप्रैल 2028 से लागू होने हैं। इन बदलावों का मकसद वाहन चलाने के दौरान सुरक्षा और नियंत्रण को बेहतर बनाना है
Bharat NCAP 2.0 भी बदलेगा सुरक्षा रेटिंग का तरीका
इन अनिवार्य सुरक्षा मानकों के अलावा, सरकार अक्टूबर 2027 से Bharat NCAP 2.0 शुरू करने की तैयारी भी कर रही है। यह कारों की सुरक्षा रेटिंग का विस्तारित ढांचा होगा, जिसमें दुर्घटना के समय सुरक्षा के साथ दुर्घटना से बचाव, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सुरक्षित ड्राइविंग तकनीक और हादसे के बाद सहायता जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में क्रैश प्रोटेक्शन को कुल 100 अंकों में 55 अंक, कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को 20 अंक, सुरक्षित ड्राइविंग तकनीकों को 10 अंक, दुर्घटना से बचाव प्रणालियों को 10 अंक और दुर्घटना के बाद की सुरक्षा को 5 अंक देने की योजना है। ध्यान रहे कि Bharat NCAP की यह रेटिंग व्यवस्था और मोटर वाहन नियमों के तहत अनिवार्य सुरक्षा मानक अलग-अलग हैं।
कार खरीदारों को क्या फायदा होगा?
नए मानकों से वाहन निर्माताओं पर बेहतर सुरक्षा तकनीक और मजबूत संरचना विकसित करने का दबाव बढ़ेगा। हालांकि, सभी बदलाव एक ही दिन लागू नहीं होंगे और अलग-अलग मॉडलों के लिए निर्धारित समयसीमा अलग है।कार खरीदते समय ग्राहकों को एयरबैग की संख्या के साथ क्रैश टेस्ट रेटिंग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, सीट बेल्ट और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था भी देखनी चाहिए। नए नियम सुरक्षा में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, लेकिन कोई भी कार दुर्घटना में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।
