Saturday, September 12, 2026
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व्हाट्सऐप से शिक्षा की नई मिसाल: डॉ. सर्वेष्ट का मॉडल, लाखों बच्चों तक पहुंच रहा पढ़ाई का सामान

by Sagar Sharma
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उत्तर प्रदेश में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने की एक पहल ने खास पहचान बनाई है। बस्ती के राष्ट्रपति पदक प्राप्त शिक्षक डॉ. सर्वेष्ट मिश्र ने कोविड काल में शुरू किए गए अपने शैक्षिक मॉडल को एक बड़े नेटवर्क में बदल दिया। उनके नेतृत्व में EduLeaders UP के जरिए शिक्षकों को जोड़ा गया और व्हाट्सऐप जैसे आसानी से उपलब्ध प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बच्चों तक शैक्षिक सामग्री पहुंचाने के लिए किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस नेटवर्क से प्रदेश के सभी 75 जिलों के शिक्षक जुड़े हैं और इसका उद्देश्य लाखों बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है।

लॉकडाउन में पैदा हुई जरूरत से निकला समाधान

मार्च 2020 में जब कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद हुए, तब सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि शिक्षक बच्चों से कैसे जुड़े रहें और उनकी पढ़ाई को जारी कैसे रखा जाए। इसी परिस्थिति में डॉ. सर्वेष्ट मिश्र ने शिक्षकों की टीम के साथ ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल शुरू किया। EduLeaders UP की स्थापना इसी दौर में हुई और धीरे-धीरे यह पहल प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच गई।

इस मॉडल की खासियत यह रही कि इसमें किसी महंगे डिजिटल सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय ऐसे माध्यम का इस्तेमाल किया गया, जिसे शिक्षक और अभिभावक पहले से जानते थे। व्हाट्सऐप समूहों के जरिए पढ़ाई से जुड़ी सामग्री, गतिविधियां और अन्य उपयोगी संसाधन साझा किए जाने लगे।

75 जिलों में बना शिक्षकों का नेटवर्क

EduLeaders UP ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में व्हाट्सऐप समूह बनाए। संगठन की वेबसाइट के मुताबिक, इन समूहों का उद्देश्य शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के साथ बच्चों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचाना भी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 तक इस नेटवर्क से 50 हजार से अधिक शिक्षक जुड़े थे और लाखों बच्चों तक इसका सीधा संपर्क था। शिक्षकों द्वारा प्रतिदिन व्हाट्सऐप समूहों और अन्य माध्यमों से शैक्षिक सामग्री साझा की जाती थी।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, कई तरह की सामग्री

इस पहल के तहत बच्चों के लिए अलग-अलग विषयों और जरूरतों के अनुसार सामग्री तैयार की जाती है। EduLeaders UP की वेबसाइट पर ज्ञान गंगा, विद्या प्रवाह, संस्कार, बूझो तो जानें, इंटरेस्टिंग थिंग्स और करके सीखें जैसी श्रृंखलाओं का उल्लेख है। इसके अलावा बच्चों के रचनात्मक विकास, कौशल विकास, सामान्य ज्ञान, विज्ञान और फिटनेस से संबंधित सामग्री भी तैयार की जाती है।

इस तरह व्हाट्सऐप को सिर्फ संदेश भेजने वाला ऐप न मानकर उसे एक डिजिटल क्लासरूम के रूप में इस्तेमाल किया गया।

डॉ. सर्वेष्ट का मॉडल क्यों बना चर्चा का विषय?

इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हर बच्चे के पास महंगे उपकरण या हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। ऐसे में मोबाइल और व्हाट्सऐप जैसे सामान्य डिजिटल माध्यम शिक्षा की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

डॉ. सर्वेष्ट मिश्र का काम सिर्फ डिजिटल सामग्री साझा करने तक सीमित नहीं रहा। उनके प्रयासों से शिक्षकों को प्रशिक्षण, नवाचार साझा करने और एक-दूसरे से सीखने का मंच भी मिला। EduLeaders UP खुद को शिक्षकों के ऐसे समूह के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें सीखने और सिखाने की प्रक्रिया में शिक्षक सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

मॉडल स्कूल से डिजिटल शिक्षा तक का सफर

डॉ. सर्वेष्ट मिश्र ने अपने स्कूल में भी नवाचार और सामुदायिक सहयोग के जरिए बदलाव किया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में उनके कार्यभार संभालने के समय विद्यालय में केवल 19 बच्चे और दो शिक्षक थे, लेकिन बाद में इसे मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया।

उनका अनुभव बताता है कि शिक्षा में बदलाव केवल बड़े बजट या अत्याधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि सही सोच और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से भी संभव है।

लाखों बच्चों तक पहुंच का बड़ा लक्ष्य

आज डिजिटल शिक्षा के दौर में सबसे बड़ी चुनौती तकनीक को हर बच्चे तक पहुंचाना है। ऐसे में व्हाट्सऐप आधारित यह मॉडल एक कम लागत वाला और आसानी से अपनाया जा सकने वाला उदाहरण प्रस्तुत करता है। हालांकि, रोजाना 20 लाख बच्चों तक रीडिंग मटेरियल पहुंचने का आंकड़ा इस उपलब्ध स्रोतों में स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं मिला है, इसलिए इसे आधिकारिक आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करने से पहले संबंधित संस्था या शिक्षा विभाग से पुष्टि जरूरी है।

फिर भी, 75 जिलों में शिक्षकों का नेटवर्क और लाखों बच्चों तक पहुंच का दर्ज रिकॉर्ड इस पहल के व्यापक प्रभाव को दिखाता है।

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