Wednesday, October 28, 2026
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अमेरिका जाने का सपना पड़ा भारी! इथियोपिया में बंधक बने 3 गुजराती, सोना गिरवी रखकर परिवार ने जुटाए पैसे

by Sagar Sharma
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अमेरिका पहुंचकर बेहतर भविष्य बनाने की उम्मीद में गुजरात से निकले एक परिवार के तीन सदस्यों को इथियोपिया में कथित तौर पर बंधक बना लिया गया। इस घटना ने विदेश जाने के लिए एजेंटों पर भरोसा करने और अवैध प्रवासन के जोखिमों को एक बार फिर सामने ला दिया। मेहसाणा और गांधीनगर से जुड़े इन तीन लोगों के परिवार ने उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए भारी आर्थिक दबाव का सामना किया। मामले में एक करोड़ रुपये तक की फिरौती मांगे जाने की बात सामने आई, जबकि परिवार पहले ही अमेरिका भेजने के लिए एजेंटों को लाखों रुपये दे चुका था।

हालांकि, बाद में गुजरात पुलिस और इथियोपियाई अधिकारियों के प्रयासों से तीनों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया। पुलिस के मुताबिक, उनकी रिहाई के लिए फिरौती नहीं दी गई।

कौन हैं इथियोपिया में बंधक बनाए गए तीन गुजराती?

इस मामले में रुत्विक जनसारी, ममता चावड़ा और मयूरी नाम के तीन रिश्तेदार शामिल थे। वे सितंबर 2026 में अमेरिका जाने के लिए भारत से रवाना हुए थे। उनकी यात्रा का इंतजाम कथित तौर पर एजेंटों के माध्यम से किया गया था।

परिवार को बताया गया था कि तीनों को ऐसे रास्ते से अमेरिका पहुंचाया जाएगा, जिसमें कई देशों से होकर आगे बढ़ना था। इसे आम तौर पर ‘डंकी रूट’ कहा जाता है। इस तरह की यात्रा में लोगों को अक्सर गैरकानूनी सीमापार प्रवेश, धोखाधड़ी, मानव तस्करी और बंधक बनाए जाने जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

एजेंटों को दिए लाखों रुपये, फिर भी बढ़ी मुश्किल

परिवार के अनुसार, अमेरिका पहुंचाने के लिए एजेंटों से बड़ी रकम में सौदा किया गया था। शुरुआती रिपोर्टों में प्रति व्यक्ति लगभग 60 से 75 लाख रुपये तक दिए जाने की बात सामने आई। अलग-अलग बयानों में भुगतान की रकम को लेकर अंतर भी बताया गया।

परिवार ने यात्रा के लिए अपनी आर्थिक क्षमता से आगे बढ़कर इंतजाम किए। सोना गिरवी रखकर पैसे जुटाने की बात भी इस मामले से जुड़ी चर्चाओं में सामने आई। इसके बावजूद विदेश पहुंचने का सपना अचानक संकट में बदल गया।तीनों के परिवारों को उम्मीद थी कि एजेंट उन्हें सुरक्षित तरीके से अमेरिका पहुंचा देंगे। लेकिन इथियोपिया पहुंचने के बाद घटनाक्रम ने गंभीर रूप ले लिया।

इथियोपिया पहुंचने के बाद टूट गया संपर्क

तीनों ने सितंबर के अंतिम दिनों में अपने परिजनों से संपर्क करना बंद कर दिया। परिवार को पहले बताया गया था कि वे कनाडा पहुंच गए हैं और वहां से अमेरिका की ओर आगे बढ़ेंगे। 22 सितंबर के बाद उनसे नियमित बातचीत नहीं हो पाई।इसके बाद परिवार को कथित अपहरण और फिरौती की मांग से जुड़ी जानकारी मिली। एक व्यक्ति ने खुद को ‘खान’ बताते हुए तीनों की रिहाई के बदले करीब एक करोड़ रुपये मांगे। परिवार पहले ही एजेंटों को बड़ी रकम दे चुका था, इसलिए अतिरिक्त भुगतान की मांग ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दीं।

परिजनों ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और गुजरात पुलिस ने संबंधित एजेंटों तथा अन्य संपर्कों की भूमिका की पड़ताल की।

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