Thursday, October 8, 2026
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नवी मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की शिफ्टिंग को लेकर बढ़ा विवाद, एयरलाइंस ने मांगा 6 साल का पूरा रिकॉर्ड

by Sagar Sharma
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मुंबई के मौजूदा एयरपोर्ट से नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों को स्थानांतरित करने की योजना को लेकर एयरलाइंस और एयरपोर्ट प्रबंधन के बीच मतभेद सामने आए हैं। विमानन कंपनियों ने उड़ानों की शिफ्टिंग के आधार और उससे जुड़ी पुरानी चर्चाओं को लेकर कई सवाल उठाए हैं। एयरलाइंस की मांग है कि 2020 से अब तक हुई बैठकों और परामर्श की पूरी जानकारी उनके सामने रखी जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नवी मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों को स्थानांतरित करने का फैसला किस प्रक्रिया के आधार पर लिया गया।

33 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शिफ्टिंग पर सवाल

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मुंबई के मौजूदा एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को नवी मुंबई एयरपोर्ट पर स्थानांतरित किया जाना है। इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के करीब 33 प्रतिशत परिचालन को दूसरी जगह ले जाने की योजना बताई जा रही है।

एयरलाइंस का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर परिचालन में बदलाव से पहले उन्हें यह जानना जरूरी है कि उड़ानों के चयन और उनके अनुपात का आधार क्या है। विमानन कंपनियां चाहती हैं कि फैसले से जुड़े दस्तावेज और छह वर्षों की बातचीत का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए।

करीब 265 साप्ताहिक उड़ानों पर असर

प्रस्तावित बदलाव से करीब 265 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान प्रभावित होने की संभावना है। इसका असर लगभग 46 एयरलाइंस के परिचालन पर पड़ सकता है। इनमें भारतीय और विदेशी दोनों विमानन कंपनियां शामिल हैं।

एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक ही शहर में दो अलग-अलग एयरपोर्ट से परिचालन करने पर विमान और क्रू की योजना बनाना अधिक जटिल हो सकता है। ग्राउंड हैंडलिंग, सामान की व्यवस्था, कनेक्टिंग फ्लाइट और यात्रियों के ट्रांसफर जैसे मामलों में भी अतिरिक्त प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है।

यात्रियों की सुविधा भी बनी चिंता

एयरलाइंस का तर्क है कि नवी मुंबई एयरपोर्ट तक पहुंचना सभी यात्रियों के लिए मौजूदा मुंबई एयरपोर्ट जितना आसान नहीं हो सकता। एयरपोर्ट बदलने से यात्रियों की यात्रा का समय बढ़ सकता है और शहर के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त परिवहन की जरूरत पड़ सकती है।

खासकर उन यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है जिनकी यात्रा में कनेक्टिंग फ्लाइट शामिल है। एयरलाइंस को यह भी देखना होगा कि यात्रियों को एयरपोर्ट में बदलाव की जानकारी समय पर कैसे दी जाए और टिकट बुकिंग के दौरान उन्हें सही एयरपोर्ट की जानकारी कैसे मिले।

टर्मिनल-1 के पुनर्विकास से जुड़ा है मामला

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के पुनर्विकास को इस पूरी योजना की प्रमुख वजह माना जा रहा है। पुराने टर्मिनल को आधुनिक बनाने और उसकी क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निर्माण कार्य प्रस्तावित है।

निर्माण के दौरान परिचालन क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में नवी मुंबई एयरपोर्ट को मुंबई महानगर क्षेत्र के दूसरे बड़े विमानन केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य दोनों एयरपोर्ट के बीच उड़ानों का संतुलन बनाना और भविष्य में बढ़ते हवाई यातायात को संभालना है।

एयरलाइंस चाहती हैं स्पष्ट योजना

विमानन कंपनियां चाहती हैं कि उड़ानों की शिफ्टिंग से पहले परिचालन लागत, स्लॉट, यात्रियों की सुविधा, कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट शुल्क जैसे मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी दी जाए। उनका मानना है कि अचानक बड़े स्तर पर बदलाव करने से एयरलाइंस के साथ-साथ यात्रियों को भी परेशानी हो सकती है।

अब इस मामले में संबंधित सरकारी अधिकारियों और विमानन क्षेत्र से जुड़े पक्षों के बीच चर्चा महत्वपूर्ण होगी। यदि सभी पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो नवी मुंबई एयरपोर्ट को मुंबई के विमानन नेटवर्क में बड़ी भूमिका मिल सकती है।

नवी मुंबई एयरपोर्ट को भविष्य में मुंबई क्षेत्र की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि, उड़ानों की शिफ्टिंग को लेकर एयरलाइंस की आपत्तियों ने यह साफ कर दिया है कि इतने बड़े बदलाव के लिए पारदर्शी प्रक्रिया, पर्याप्त तैयारी और यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।

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