भारत में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। अब समुद्र की तेज और लगातार चलने वाली हवाओं का इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए किया जाएगा। तमिलनाडु के थूथुकुडी में देश की शुरुआती बड़े पैमाने की ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजना के तहत 6.25 मेगावाट क्षमता की विंड टर्बाइन स्थापित की जाएगी। करीब ₹77.41 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भविष्य में समुद्र में बड़े विंड फार्म विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।
समुद्र के बीच लगेगी 6.25 MW की टर्बाइन
इस परियोजना के तहत एक बड़ी विंड टर्बाइन समुद्र में स्थापित की जाएगी। इसे समुद्र के तल पर मजबूत फाउंडेशन के जरिए खड़ा किया जाएगा। टर्बाइन से पैदा होने वाली बिजली को समुद्र के भीतर बिछाई जाने वाली सबमरीन केबल के माध्यम से तट तक लाया जाएगा। इसके बाद बिजली को ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
फिलहाल परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल बिजली पैदा करना नहीं है। इसके जरिए भारत समुद्र में विंड टर्बाइन लगाने, उनका संचालन करने और उनसे बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने से जुड़ी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करेगा।
समुद्र की हवा क्यों है खास?
जमीन की तुलना में समुद्र के ऊपर हवाएं ज्यादा तेज और अपेक्षाकृत स्थिर होती हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में ऑफशोर विंड एनर्जी तेजी से विकसित हुई है।
भारत के पास लगभग 7,600 किलोमीटर लंबी तटरेखा है। ऐसे में समुद्री हवाओं से बिजली उत्पादन के लिए देश के पास काफी संभावनाएं मौजूद हैं। खासतौर पर गुजरात और तमिलनाडु के समुद्री क्षेत्रों को ऑफशोर विंड एनर्जी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अगर शुरुआती परियोजनाओं से अपेक्षित परिणाम मिलते हैं, तो आने वाले वर्षों में समुद्र के भीतर कई टर्बाइनों वाले बड़े विंड फार्म स्थापित किए जा सकते हैं।
साइकिल से लेकर ग्रीन एनर्जी तक पहुंचा Hero Group
इस परियोजना से जुड़ी चर्चा में Hero Group का नाम भी सामने आता है। देश में साइकिल कारोबार के लिए पहचाने जाने वाला यह समूह पिछले कुछ वर्षों में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।
समूह की कंपनी Hero Future Energies विंड और सोलर एनर्जी परियोजनाओं पर काम करती है। हालांकि थूथुकुडी में स्थापित होने वाला 6.25 MW का ऑफशोर विंड प्रोटोटाइप सीधे तौर पर किसी निजी कंपनी के सामान्य विंड फार्म के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका बड़ा उद्देश्य भारत के ऑफशोर विंड सेक्टर के लिए तकनीकी और औद्योगिक क्षमता तैयार करना है।
बड़े विंड फार्म का रास्ता होगा साफ
समुद्र में टर्बाइन स्थापित करना जमीन पर विंड टर्बाइन लगाने से काफी जटिल होता है। इसके लिए विशेष जहाजों, समुद्री इंजीनियरिंग, मजबूत फाउंडेशन, अंडरवाटर केबल, पोर्ट सुविधाओं और मौसम की निगरानी जैसी कई व्यवस्थाओं की जरूरत होती है।
थूथुकुडी परियोजना से भारत को इन सभी क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में बड़े ऑफशोर विंड फार्म लगाने के दौरान आने वाली तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों को कम किया जा सकेगा।
रिन्यूएबल एनर्जी में बढ़ेगा समुद्र का योगदान
भारत पहले ही सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है। अब समुद्री हवाओं को ऊर्जा उत्पादन के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में कदम बढ़ाना देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
अगर ऑफशोर विंड परियोजनाएं बड़े स्तर पर सफल होती हैं, तो इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने और लंबे समय में देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
