संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी कूटनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब देते हुए पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे, आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर से जुड़े उसके बयानों पर सवाल उठाए। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की।
भारत ने पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था पर साधा निशाना
भारत ने पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कहा कि वहां सत्ता के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को ऐसी व्यवस्था के रूप में वर्णित किया जिसमें सेना का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है
भारत की ओर से यह टिप्पणी पाकिस्तान में सैन्य और राजनीतिक संस्थानों के बीच संबंधों के संदर्भ में की गई। हालांकि, यह भारत का आधिकारिक आकलन है और इसे पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर एक पक्ष की कूटनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जाना चाहिए।
27वें संविधान संशोधन का भी जिक्र
अपने जवाब में भारत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया। भारतीय पक्ष के अनुसार, इस संशोधन के जरिए पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को आजीवन कानूनी संरक्षण से जुड़ा प्रावधान दिया गया है।
भारत ने इसे पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान की स्थिति से जोड़ते हुए अपनी दलील रखी। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान में सेना लंबे समय से देश की राजनीति और सुरक्षा नीति में प्रभावशाली संस्था रही है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी घेरा
भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को लेकर भी आरोप लगाए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की नीतियों के परिणाम होंगे। भारत ने यह भी कहा कि केवल बार-बार एक ही तरह के दावे दोहराने से वे सच नहीं हो जाते।भारत की ओर से पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए अतीत की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। विशेष रूप से अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के एबटाबाद में पाए जाने का संदर्भ सामने रखा गया।
कश्मीर के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने संयुक्त राष्ट्र संबोधन में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में भारत ने अपने पुराने और आधिकारिक रुख को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपने क्षेत्र से जुड़े आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर लंबे समय से सबसे संवेदनशील विवादित विषयों में शामिल रहा है।
अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों का मुद्दा भी उठा
भारत ने पाकिस्तान की ओर से लोकतंत्र और मानवाधिकारों से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलने से पहले अपने देश के रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक हालात को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए, जबकि पाकिस्तान की ओर से भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत ने खारिज किया। इस तरह महासभा में दोनों देशों के बीच पुरानी राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी असहमति एक बार फिर सामने आई।
आगे भी जारी रह सकती है कूटनीतिक तनातनी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुई यह बहस भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव का एक और उदाहरण है। भारत ने आतंकवाद को द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में इसके परिणाम होंगे
वहीं पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर समेत विभिन्न मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र का मंच दोनों देशों के लिए अपने-अपने पक्ष को वैश्विक समुदाय के सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
फिलहाल इस बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि भारत आतंकवाद और पाकिस्तान की राजनीतिक-सैन्य संरचना को लेकर अपने रुख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रख रहा है, जबकि पाकिस्तान कश्मीर और अन्य मुद्दों को उठाना जारी रखे हुए है। आने वाले समय में दोनों देशों की कूटनीतिक गतिविधियों पर इस टकराव का असर देखने को मिल सकता है।
