दिवाली से पहले Troop Comforts Limited (TCL) के कर्मचारियों के बोनस को लेकर नया विवाद सामने आया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी ने सिविलियन कर्मचारियों को 18.56 दिनों की मजदूरी के बराबर Productivity Linked Bonus (PLB) देने को मंजूरी दी है। बोनस की अवधि पहले के वर्षों में मिलने वाले भुगतान की तुलना में कम होने के कारण कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।
18.56 दिन के PLB का ऐलान
TCL के आदेश के मुताबिक Group-B (Non-Gazetted) और Group-C कर्मचारियों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का PLB 18.56 दिनों की मजदूरी के बराबर होगा। बोनस की गणना के लिए 30.4 दिनों को एक महीने की औसत अवधि माना गया है।
बोनस की गणना के लिए ₹7,000 प्रति माह की अधिकतम सीमा लागू है। इस आधार पर 18.56 दिनों का बोनस लगभग ₹4,274 बैठता है। हालांकि किसी कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि पात्रता और लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।
पुराने बोनस से तुलना पर उठे सवाल
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण से पहले कर्मचारियों को कई मौकों पर इससे अधिक अवधि का PLB मिलता था। उनके अनुसार पहले बोनस करीब 30 से 41 दिन या उससे अधिक तक रहा है।
यदि ₹7,000 की सीमा के आधार पर केवल गणितीय तुलना की जाए तो 41 दिनों के बोनस की राशि करीब ₹9,441 होती है, जबकि 18.56 दिनों पर यह लगभग ₹4,274 बनती है। इसी अंतर को लेकर कर्मचारियों और संगठनों के बीच चर्चा तेज हुई है।
निगमीकरण के बाद बदला बोनस का ढांचा
ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेट DPSU में बदलने के बाद कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उत्पादकता आधारित बोनस व्यवस्था में बदलाव हुए हैं। कर्मचारी संगठन मौजूदा PLB व्यवस्था की तुलना पुराने सिस्टम से कर रहे हैं।संगठनों का तर्क है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन और उत्पादन में योगदान को देखते हुए बोनस व्यवस्था पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। वहीं बोनस निर्धारण कंपनी पर लागू नियमों और निर्धारित गणना पद्धति के आधार पर किया जाता है।
दिवाली से पहले कर्मचारियों के बीच चर्चा
त्योहारी सीजन में बोनस कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम होता है। ऐसे में बोनस की अवधि कम होने की खबर ने कर्मचारियों के बीच चर्चा बढ़ा दी है।
खासकर वे कर्मचारी जो पहले अधिक अवधि के PLB का लाभ लेते रहे हैं, उनके लिए मौजूदा 18.56 दिनों का भुगतान तुलना का विषय बना हुआ है। हालांकि अंतिम भुगतान कर्मचारी की पात्रता और निर्धारित गणना के अनुसार ही किया जाएगा।
संगठनों ने जताई असहमति
कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा बोनस व्यवस्था पर अपनी असहमति जाहिर की है। संगठनों की ओर से पुराने PLB पैटर्न का हवाला देते हुए वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि बोनस को लेकर कर्मचारियों की अपेक्षाएं लंबे समय से अधिक रही हैं और नई व्यवस्था में इस अंतर को समझने की जरूरत है। आगे इस मुद्दे पर प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत होने की संभावना पर नजर रहेगी।
बोनस की वास्तविक राशि कैसे तय होगी?
18.56 दिन का PLB एक निर्धारित गणना के आधार पर तय किया गया है। ₹7,000 की अधिकतम गणना सीमा के कारण सभी कर्मचारियों के लिए वास्तविक भुगतान उनकी पूरी मासिक सैलरी के अनुपात में नहीं बढ़ेगा।
इसलिए कर्मचारियों को केवल 18.56 दिनों के आंकड़े के आधार पर अपनी व्यक्तिगत बोनस राशि का अनुमान लगाने के बजाय कंपनी के आदेश और अपनी पात्रता के अनुसार भुगतान देखना होगा।
आगे बातचीत पर रहेंगी नजरें
फिलहाल मुख्य मुद्दा बोनस की अवधि और पुराने PLB के मुकाबले इसके अंतर को लेकर है। TCL की ओर से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 18.56 दिनों का PLB मंजूर किया गया है, जबकि कर्मचारी संगठन इसे पुराने बोनस पैटर्न से जोड़कर देख रहे हैं।दिवाली से पहले सामने आया यह फैसला TCL के कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक विषय बन गया है। अब आगे होने वाली बातचीत और किसी संभावित बदलाव पर कर्मचारियों की नजर रहेगी।
