Friday, October 9, 2026
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पाकिस्तान के विरोध के बीच UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता पर बढ़ा समर्थन

by Sagar Sharma
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। इसी बीच पाकिस्तान से जुड़े Uniting for Consensus समूह की ओर से नई स्थायी सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध सामने आया है, जबकि भारत की दावेदारी को कई देशों का समर्थन मिल रहा है

सुरक्षा परिषद के विस्तार को लेकर अलग-अलग राय

UNSC में सुधार को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही है। एक पक्ष सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की वकालत करता है, जबकि कुछ देश निर्वाचित यानी गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या और कार्यकाल बढ़ाने जैसे विकल्पों का समर्थन करते हैं।

पाकिस्तान Uniting for Consensus समूह का हिस्सा है। यह समूह सुरक्षा परिषद में नई स्थायी सीटें बनाने के बजाय दूसरे प्रतिनिधित्व मॉडल पर जोर देता है। इस बहस में भारत की स्थायी सदस्यता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठता रहा है।

भारत की दावेदारी को मिल रहा अंतरराष्ट्रीय समर्थन

भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को लेकर कई देशों ने अपना समर्थन व्यक्त किया है। हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने सितंबर 2026 में भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब भारत संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं में व्यापक सुधार की मांग लगातार उठा रहा है। भारत का रुख है कि वैश्विक संस्थाओं को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आज की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।

अभी पांच देशों के पास स्थायी सीट

वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस पांच स्थायी सदस्य हैं। इन देशों के पास वीटो का अधिकार है। बाकी 10 सदस्य महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।

भारत का तर्क रहा है कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पिछले कई दशकों में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में सुरक्षा परिषद की संरचना में भी व्यापक प्रतिनिधित्व की जरूरत है।

भारत की मांग के पीछे लंबे समय की कोशिश

भारत कई बार UNSC का निर्वाचित सदस्य रह चुका है और स्थायी सदस्यता के लिए व्यापक समर्थन जुटाने की कोशिश करता रहा है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान G4 के रूप में सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता में बदलाव का समर्थन करते हैं।हालांकि स्थायी सदस्यता का रास्ता केवल दूसरे देशों के समर्थन से पूरा नहीं होता। सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया और व्यापक सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होगी।

पाकिस्तान का रुख क्या है?

पाकिस्तान और Uniting for Consensus समूह से जुड़े देश नई स्थायी सीटों के विस्तार के बजाय निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने और अन्य प्रतिनिधित्व मॉडल पर जोर देते हैं।दूसरी ओर भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले प्रस्ताव का समर्थन करता है। इस वजह से UNSC सुधार को लेकर दोनों देशों के रुख अलग-अलग हैं। हालांकि यह बहस केवल भारत और पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के स्वरूप से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।

आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर

संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार की प्रक्रिया अभी जारी है और सदस्य देशों के बीच अलग-अलग प्रस्तावों पर बातचीत हो रही है। भारत को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय समर्थन उसकी कूटनीतिक कोशिशों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इससे स्थायी सदस्यता अपने आप सुनिश्चित नहीं होती।

स्थायी सदस्यता का अंतिम फैसला व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति, अंतर-सरकारी वार्ता और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आवश्यक बदलावों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। ऐसे में आने वाले समय में UNSC सुधार को लेकर होने वाली चर्चाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

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