गणेश उत्सव के अंतिम दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धालुओं ने नम आंखों से गणपति बप्पा को विदाई दी। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष के बीच भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। सुबह से ही शहरों की गलियों, बाजारों और पूजा पंडालों में भक्तों की भीड़ नजर आई। ढोल-नगाड़ों, भजनों और रंग-बिरंगे जुलूसों के साथ श्रद्धालु बप्पा को विदा करने के लिए निकले।
पूजा पंडालों से निकलीं भव्य विसर्जन यात्राएं
गणेश उत्सव के दौरान स्थापित की गई प्रतिमाओं को अंतिम दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन के लिए ले जाया गया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने गणपति की प्रतिमा को फूलों से सजाया और आरती की। इसके बाद डीजे, ढोल-ताशों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ विसर्जन यात्रा शुरू हुई।
जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हुए। श्रद्धालु रास्तेभर गणपति बप्पा के जयकारे लगाते रहे। कई जगहों पर लोगों ने गुलाल उड़ाकर और नृत्य करते हुए उत्सव का आनंद लिया।
मुंबई में दिखा उत्साह और भक्ति का संगम
महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन का विशेष महत्व है। मुंबई और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं और घरों में स्थापित गणपति का विसर्जन किया गया। प्रमुख विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली।
लालबागचा राजा समेत कई प्रसिद्ध गणपति प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राओं में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। इस दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए।
दिल्ली समेत कई शहरों में भी भव्य आयोजन
राजधानी दिल्ली सहित देश के कई शहरों में भी गणेश विसर्जन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह नजर आया। विभिन्न इलाकों में बनाए गए पूजा पंडालों से प्रतिमाओं को शोभायात्रा के रूप में विसर्जन स्थलों तक ले जाया गया।
कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने रास्तों में श्रद्धालुओं के लिए पानी और प्रसाद की व्यवस्था की। विसर्जन यात्रा के दौरान भक्ति गीतों और गणपति के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
नम आंखों से दी गई बप्पा को विदाई
गणपति विसर्जन श्रद्धालुओं के लिए भावुक पल भी होता है। कई परिवारों ने घर में स्थापित गणपति की प्रतिमा का विधिवत पूजन किया और परिवार के सदस्यों ने मिलकर बप्पा को विदाई दी।विसर्जन से पहले भक्तों ने भगवान गणेश से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इसके बाद प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाया गया। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष के साथ भक्तों ने बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।
पर्यावरण को लेकर भी दिखी जागरूकता
गणेश विसर्जन के दौरान कई स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया। श्रद्धालुओं ने पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने और निर्धारित विसर्जन स्थलों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
प्रशासन की ओर से भी कई जगह कृत्रिम तालाब और विशेष विसर्जन कुंड तैयार किए गए, ताकि नदियों और अन्य जलस्रोतों पर पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।
गणेश उत्सव के समापन के साथ ही शहरों में कई दिनों से चला आ रहा उत्सव समाप्त हो गया। हालांकि बप्पा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम रहीं, लेकिन अगले वर्ष फिर गणपति के स्वागत की उम्मीद के साथ भक्तों ने उन्हें विदा किया। देशभर में हुए विसर्जन समारोहों ने एक बार फिर भक्ति, आस्था, परंपरा और सामुदायिक उत्सव की तस्वीर पेश की।
