Thursday, October 8, 2026
Thursday, October 8, 2026
Home देशBRICS में चीन के बढ़ते दांव से भारत के सामने नई चुनौतियां, जिनपिंग की रणनीति में छिपे 5 संकेत

BRICS में चीन के बढ़ते दांव से भारत के सामने नई चुनौतियां, जिनपिंग की रणनीति में छिपे 5 संकेत

by Sagar Sharma
0 comments

BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वित्तीय सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने रखे। चीन की इन पहलों का उद्देश्य BRICS देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, भारत के नजरिए से इनमें कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर सावधानी से आगे बढ़ना जरूरी होगा।

भारत और चीन के रिश्तों में हाल के समय में संवाद बढ़ा है, लेकिन सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, तकनीकी निर्भरता और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मुद्दे अभी भी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में BRICS के भीतर चीन की सक्रियता भारत के लिए अवसर के साथ-साथ रणनीतिक चुनौती भी पेश कर सकती है।

1. BRICS के बड़े बाजार पर चीन की नजर

शी जिनपिंग ने BRICS देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए बड़े तथा एकीकृत बाजार की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया। इससे सदस्य देशों के बीच कारोबार बढ़ सकता है और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।लेकिन भारत के लिए चुनौती यह है कि चीन पहले से ही बड़े पैमाने पर वैश्विक बाजारों में अपने उत्पाद पहुंचाता है। यदि BRICS देशों के बीच बाजार और व्यापार व्यवस्था ज्यादा खुलती है, तो भारतीय कंपनियों को चीनी उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

2. AI के क्षेत्र में चीन का बड़ा प्लान

चीन ने BRICS देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही है। इसके तहत ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम और AI को मैन्युफैक्चरिंग समेत विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।भारत भी AI के क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। ऐसे में चीन के साथ तकनीकी सहयोग से अवसर पैदा हो सकते हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों को लेकर भारत को सतर्क रहना होगा।

3. सप्लाई चेन में बढ़ सकता है बीजिंग का प्रभाव

चीन ने BRICS देशों के बीच औद्योगिक सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में भी जोर दिया है। वैश्विक कंपनियों के लिए मजबूत सप्लाई चेन निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत लंबे समय से चीन पर अपनी रणनीतिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोलर उपकरण, बैटरी और कई औद्योगिक वस्तुओं के मामले में चीन की बड़ी भूमिका है। ऐसे में BRICS के माध्यम से आर्थिक संबंध बढ़ाते समय भारत को अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता और वैकल्पिक सप्लाई चेन को भी मजबूत करना होगा।

4. डॉलर से अलग वित्तीय व्यवस्था की कोशिश

BRICS में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिश भी चीन की रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना है।भारत भी रुपये में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था की संभावनाओं पर काम कर रहा है। हालांकि, चीन की विशाल अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में उसकी मजबूत स्थिति को देखते हुए किसी भी नई वित्तीय व्यवस्था में बीजिंग का प्रभाव काफी बढ़ सकता है।

5. BRICS में चीन का नेतृत्व और मजबूत होने की संभावना

भारत के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक सवाल BRICS के भीतर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर है। चीन आर्थिक रूप से संगठन के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है। BRICS के विस्तार के साथ उसका राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव भी बढ़ रहा है।चीन की कोशिश है कि BRICS को वैश्विक दक्षिण के लिए एक मजबूत आर्थिक और राजनीतिक मंच के रूप में विकसित किया जाए। भारत भी वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने का समर्थन करता है, लेकिन वह नहीं चाहेगा कि BRICS का एजेंडा किसी एक देश के प्रभाव में आ जाए।

भारत के लिए चुनौती के साथ अवसर भी

चीन की पहलों को केवल खतरे के रूप में देखना भी सही नहीं होगा। व्यापार, AI, तकनीक, वित्त और सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग से भारत को भी आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। जरूरत इस बात की है कि भारत अपने हितों और रणनीतिक स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए इन पहलों में भागीदारी करे।भारत-चीन संबंधों में संवाद और स्थिरता के प्रयासों के बीच BRICS एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि चीन संगठन के भीतर अपनी प्राथमिकताओं को किस तरह आगे बढ़ाता है और भारत इन पहलों के बीच अपने आर्थिक तथा रणनीतिक हितों का संतुलन कैसे बनाए रखता है।

Author

You may also like