Monday, September 14, 2026
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हरतालिका तीज का व्रत बिना पानी पिए क्यों रखा जाता है? जानें पौराणिक मान्यता और पूजा के नियम Hartalika Teej Nirjala Vrat 2026:निर्जला व्रत के पीछे छिपी है माता पार्वती की कठोर तपस्या, जानें पूरी मान्यता

by Sagar Sharma
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हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं। वर्ष 2026 में हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।

जल त्यागने की परंपरा के पीछे क्या है विश्वास

हरतालिका तीज की सबसे खास बात इसका निर्जला स्वरूप है। परंपरा के अनुसार इस व्रत में अन्न के साथ जल का भी त्याग किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी तप, त्याग और अटूट संकल्प की स्मृति में हरतालिका तीज पर महिलाएं कठिन उपवास करती हैं।

निर्जला व्रत को केवल भोजन या पानी का त्याग नहीं माना जाता, बल्कि यह मन, वाणी और इंद्रियों पर संयम का प्रतीक भी है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के साथ व्रत करने से माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

सखी के साथ वन में पहुंचीं थीं माता पार्वती

पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। मान्यता है कि उनकी सहेली उन्हें ऐसी जगह ले गईं, जहां वे एकांत में तप कर सकें और अपनी साधना पूरी कर सकें। इसी वजह से इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा।

‘हर’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी या सहेली। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती की कठोर साधना और अटूट भक्ति के बाद भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

शिव-पार्वती पूजन में किन विधियों का करें पालन

व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई परंपराओं में मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर उनका पूजन किया जाता है।

पूजा के दौरान माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी है। भगवान शिव को बेलपत्र सहित पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है और भगवान शिव-पार्वती की आरती की जाती है।

14 सितंबर को सजेगा शिव-पार्वती का दरबार

पंचांग के अनुसार 2026 में हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह समाप्त होगी। दिल्ली के लिए सुबह की पूजा का मुहूर्त लगभग सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

निर्जला उपवास में इन सावधानियों को न करें नजरअंदाज

हरतालिका तीज का निर्जला व्रत कठिन माना जाता है, इसलिए इसे अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या ऐसी किसी भी व्यक्ति को जिसे लंबे समय तक बिना पानी के रहने में परेशानी हो सकती है, धार्मिक परंपरा निभाने के लिए स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं डालना चाहिए। आवश्यकता होने पर परिवार की परंपरा और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण किया जा सकता है।

धार्मिक दृष्टि से इस व्रत का मूल भाव श्रद्धा, संयम और शिव-पार्वती के प्रति समर्पण है। इसलिए केवल कठोरता नहीं, बल्कि मन की भक्ति और सकारात्मक भावना को भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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