चित्रकूट में बाढ़ का पानी कम होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली ही थी कि बारिश ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को क्षेत्र में रुक-रुककर बारिश जारी रहने और पहाड़ी इलाकों से पानी आने के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा। रामघाट क्षेत्र में नदी का पानी बढ़ने से प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ के बाद अब सड़कों पर संकट
हालिया बाढ़ ने चित्रकूट के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कर्वी में मंदाकिनी नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है। यह पुल झांसी-मिर्जापुर हाईवे से जुड़ा है, इसलिए सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। फिलहाल छोटे वाहनों और दोपहिया वाहनों को सावधानी के साथ निकालने की अनुमति दी जा रही है।
प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू किया गया है। एप्रोच रोड के धंसने के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंदाकिनी ने दिखाया था रौद्र रूप
पिछले दिनों लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने बेहद विकराल रूप धारण कर लिया था। नदी का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था और कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया था। रिपोर्टों के अनुसार, नदी ने करीब 23 साल पुराने जलस्तर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
रामघाट समेत कई इलाके जलमग्न हो गए थे। बाढ़ की वजह से कई दुकानें और सड़कें प्रभावित हुईं, जबकि कुछ पुल और संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए। हनुमानधारा क्षेत्र का पुल भी बाढ़ की चपेट में आया।
कई मार्गों पर आवाजाही प्रभावित
बाढ़ के तेज बहाव से चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में कई सड़कों और पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचा है। चित्रकूट-सतना मार्ग पर भी कई जगह कटाव और क्षति की सूचना है। भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाए जाने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। कुछ वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है।
बांदा-प्रयागराज मार्ग पर भी बाढ़ का असर पड़ा था। बस सेवाएं प्रभावित हुईं और कई बसों को रास्ते में रोकना पड़ा।
दोबारा बढ़ता पानी बढ़ा रहा चिंता
सोमवार को मंदाकिनी के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी की खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट में सुबह नदी का जलस्तर 128.900 मीटर तक पहुंचने और रामघाट में अलर्ट की बात कही गई है। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में बारिश थमने के बाद जलस्तर में कमी के संकेत भी बताए गए हैं। यानी स्थिति लगातार बदल रही है और स्थानीय प्रशासन नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान पहले से जारी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी चित्रकूट और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और निचले इलाकों से दूर रहने तथा हालात बिगड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल चित्रकूट में सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ से हुए नुकसान के बाद सामान्य जनजीवन बहाल करना और दोबारा बढ़ते जलस्तर से लोगों को सुरक्षित रखना है। बारिश का दौर जारी रहने पर स्थिति फिर गंभीर हो सकती है, इसलिए प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
