नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता हैं, जबकि नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 162 तक पहुंच गई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
तिब्बत में 558 लोग अब भी लापता
नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने दोनों देशों को बुरी तरह प्रभावित किया है। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में बाढ़ और मलबे की घटना के बाद 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीन की ओर कम से कम तीन लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।
ग्यिरोंग इलाके में बाढ़ और मलबे की तेज लहर ने सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। सीमा क्षेत्र में कई रास्ते बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल में 162 लोगों की मौत
नेपाल में भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाली अधिकारियों के अनुसार विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद मृतकों की संख्या 162 हो गई है। सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और अधिकारियों को आशंका है कि खोज अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
बाढ़ से रसुवा, धादिंग, नुवाकोट समेत कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। तेज पानी और मलबे ने घरों, वाहनों, पुलों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया। कई जगहों पर बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और भारतीय भी प्रभावित
इस आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी लापता हैं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक लापता लोगों में भारत समेत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिक शामिल हैं। कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा और हिमालयी पर्यटन के सिलसिले में इस क्षेत्र में मौजूद थे।
भारतीय नागरिकों की मौजूदगी को देखते हुए भारत की ओर से भी राहत एवं बचाव सहायता भेजी जा रही है। प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम जारी है।
ग्लेशियर टूटने से आई तबाही?
शुरुआती जानकारी में इस आपदा को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद की वैज्ञानिक जांच में ग्लेशियर या बर्फ और चट्टानों के ढहने से पैदा हुए मलबे के बहाव को प्रमुख कारण माना गया है। इस मलबे ने नदी के प्रवाह को प्रभावित किया और इसके बाद अचानक पानी का विशाल प्रवाह नीचे की ओर बढ़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से गर्म होते हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की अस्थिरता और चरम मौसम की घटनाएं भविष्य में ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ा सकती हैं।
युद्धस्तर पर जारी रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल और चीन दोनों तरफ राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य बचाव दल हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। तिब्बत में भी बड़ी संख्या में बचावकर्मी, वाहन और खोजी दल तैनात किए गए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे लोगों और लापता लोगों का पता लगाना है। कई इलाकों में सड़क और संचार संपर्क टूटने के कारण बचाव अभियान बेहद कठिन बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच बढ़ेगी, नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
अलग-अलग रिपोर्टों में लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों में कुछ लोगों की गिनती दो बार हुई है या नहीं। इसलिए आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है।
