भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरा शुक्रवार को समाप्त हो गया। यह यात्रा कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण रही, क्योंकि गोर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद लद्दाख का दौरा करने वाले पहले सेवारत अमेरिकी राजदूत हैं। चीन की सीमा से सटे इस रणनीतिक क्षेत्र में उनकी मौजूदगी को भारत-अमेरिका संबंधों और क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना गया।
दलाई लामा से मुलाकात की थी चर्चा
गोर के लद्दाख पहुंचने से पहले सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि वह लेह में मौजूद तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, यह मुलाकात आखिरकार नहीं हो सकी। रिपोर्टों के मुताबिक, गोर के लेह पहुंचने से कुछ घंटे पहले उनके कार्यक्रम में बदलाव किया गया और प्रस्तावित बैठक रद्द हो गई। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की ओर से भी कार्यक्रम में बदलाव की बात सामने आई, लेकिन बैठक रद्द होने की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन दलाई लामा को लेकर बेहद संवेदनशील रुख रखता है। ऐसे में चीन की सीमा के बेहद करीब लद्दाख में अमेरिकी राजदूत और दलाई लामा की मुलाकात बीजिंग के लिए एक बड़ा कूटनीतिक संदेश मानी जा सकती थी। भारत में अगले महीने होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को देखते हुए भी इस तरह के कदम से पैदा होने वाली संभावित कूटनीतिक प्रतिक्रिया से बचने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है। हालांकि, बैठक रद्द करने के पीछे यही आधिकारिक कारण था, इसकी पुष्टि किसी पक्ष ने नहीं की है।
जांस्कर-सिंधु संगम पर राफ्टिंग
लद्दाख पहुंचने के बाद गोर ने लेह में विभिन्न स्थानों का दौरा किया और इसके बाद जांस्कर-सिंधु नदी क्षेत्र में रिवर राफ्टिंग की। उन्होंने त्सोगती से सिंधु और जांस्कर नदियों के संगम यानी संगम क्षेत्र तक कई किलोमीटर की दूरी राफ्टिंग के जरिए तय की। यह गतिविधि उनके दौरे का सबसे चर्चित गैर-कूटनीतिक हिस्सा रही।
गोर की यात्रा के दौरान लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से मुलाकात की भी संभावना थी, लेकिन वह उस समय नई दिल्ली में थे। वहीं, गोर ने लद्दाख में किसी राजनीतिक नेता से मुलाकात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी राजदूत ने अपना दौरा समाप्त कर दिल्ली वापसी की।
चीन के लिए क्या है संदेश?
सर्जियो गोर का लद्दाख दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा है। इसलिए किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत का लद्दाख पहुंचना अपने आप में रणनीतिक महत्व रखता है।
इससे पहले श्रीनगर में गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। उनके इस बयान पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई और अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया। ऐसे में कश्मीर के बाद लद्दाख की यात्रा और फिर दलाई लामा से प्रस्तावित मुलाकात का रद्द होना इस पूरे दौरे को और ज्यादा कूटनीतिक महत्व देता है।
कुल मिलाकर, गोर की लद्दाख यात्रा भले ही छोटी रही, लेकिन इसका संदेश व्यापक माना जा रहा है। उन्होंने संवेदनशील सीमा क्षेत्र का दौरा किया, जांस्कर-सिंधु संगम पर राफ्टिंग की और बिना किसी बड़े राजनीतिक विवाद के दिल्ली लौट गए। दलाई लामा से मुलाकात का रद्द होना इस दौरे की सबसे महत्वपूर्ण और रहस्यमयी घटना बनकर सामने आया है।
