भारतीय शेयर बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों की चिंता एक बार फिर सामने आई है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के ताजा फंड मैनेजर सर्वे में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेशकों का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है। खास बात यह है कि भारत ने इस मामले में इंडोनेशिया को पीछे छोड़ दिया है, जो पहले इस सूची में सबसे नीचे था। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारतीय शेयर बाजार इस साल कमजोर प्रदर्शन कर रहा है और विदेशी निवेशकों की रणनीति में सावधानी दिखाई दे रही है।
32% फंड मैनेजर भारत पर अंडरवेट
बैंक ऑफ अमेरिका के अगस्त सर्वे में करीब 98 फंड मैनेजर शामिल हुए, जिनके पास कुल लगभग 272 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन है। सर्वे में 32 प्रतिशत फंड मैनेजर भारतीय शेयरों पर ‘नेट अंडरवेट’ रहे। इसका अर्थ है कि इन निवेशकों ने अपने बेंचमार्क की तुलना में भारतीय शेयरों में कम निवेश रखने की रणनीति अपनाई है।
बढ़ती सतर्कता का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं या भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है। यह मुख्य रूप से निवेशकों की मौजूदा बाजार प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
इंडोनेशिया से क्यों पिछड़ा भारत?
सर्वे में भारत की कमजोर स्थिति के पीछे कई कारण बताए गए हैं। भारतीय शेयर बाजार का इस साल प्रदर्शन एशिया के कई अन्य बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है। इसके अलावा भारतीय शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन, आर्थिक विकास को लेकर कुछ चिंताएं और कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर सावधानी भी निवेशकों के फैसले को प्रभावित कर रही है।
दूसरी ओर, इंडोनेशिया को लेकर निवेशकों का रुख बेहतर हुआ है। यही बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय बना है, क्योंकि कुछ समय पहले तक इंडोनेशिया एशिया का सबसे कम पसंदीदा बाजार माना जा रहा था।
शेयर बाजार के प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय बेंचमार्क निफ्टी 50 इस साल करीब 8 प्रतिशत नीचे है, जबकि कॉरपोरेट कमाई में लगभग 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी कंपनियों की कमाई में सुधार के बावजूद शेयर बाजार का प्रदर्शन उसी अनुपात में मजबूत नहीं हुआ है।
यही अंतर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। अगर कंपनियों की कमाई बढ़ रही है, लेकिन शेयरों की कीमतें अपेक्षाकृत कमजोर हैं, तो बाजार में वैल्यूएशन को लेकर नई गणना शुरू हो सकती है।
AI सेक्टर में कम एक्सपोजर भी चुनौती
बैंक ऑफ अमेरिका के सर्वे में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी इस समय तकनीक और खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े क्षेत्रों में बनी हुई है। भारत की अर्थव्यवस्था में आईटी और टेक कंपनियों की बड़ी भूमिका होने के बावजूद, भारतीय बाजार में अमेरिका या कुछ अन्य एशियाई बाजारों की तुलना में AI से सीधे जुड़ी बड़ी कंपनियों का एक्सपोजर सीमित माना जा रहा है।
क्या यह भारत के लिए बड़ा खतरा है?
सर्वे को भारत की अर्थव्यवस्था की रेटिंग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से फंड मैनेजरों की निवेश प्राथमिकताओं का सर्वे है। भारत की आर्थिक वृद्धि, घरेलू खपत और कॉरपोरेट आय जैसे कई सकारात्मक पहलू अभी भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
फिर भी, विदेशी निवेशकों का बदलता रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत जरूर है। यदि भारतीय शेयरों की वैल्यूएशन और कमाई के बीच संतुलन बेहतर होता है तथा बाजार में नए अवसर सामने आते हैं, तो निवेशकों की धारणा दोबारा मजबूत हो सकती है।
फिलहाल बैंक ऑफ अमेरिका का सर्वे भारतीय बाजार के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। भारत की चुनौती अब केवल आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों को यह भरोसा दिलाने की भी है कि मौजूदा वैल्यूएशन पर भारतीय शेयरों में पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
