देश में बढ़ते कचरे और उसकी सही तरीके से सफाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि ज्यादा कचरा फैलाने वाले लोगों को पहले लिखित सूचना देकर नियमों का पालन करने के लिए कहा जाए. अगर कोई व्यक्ति ठोस कचरे को अलग-अलग नहीं करता, उसे सही तरीके से स्टोर नहीं करता या तय व्यवस्था के तहत जमा नहीं करता, तो उसके बिजली और पानी के कनेक्शन को अस्थायी रूप से काटा जा सकता है. कोर्ट ने इसके साथ स्कूलों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की पढ़ाई और व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी जरूरी बनाने के निर्देश दिए हैं.
नियम तोड़ने पर बिजली-पानी की सप्लाई होगी बंद
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. अगर कोई व्यक्ति घर या परिसर से निकलने वाले ठोस कचरे को अलग-अलग नहीं करता और उसे निर्धारित तरीके से नहीं सौंपता है, तो स्थानीय प्रशासन कार्रवाई कर सकता है.
कोर्ट के निर्देश के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को पहले लिखित रूप से इसकी जानकारी दी जाएगी. उन्हें नियमों का पालन करने के लिए कहा जाएगा. इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर बिजली और पानी की सप्लाई अस्थायी रूप से बंद की जा सकती है. इस संबंध में आदेश जिला कलेक्टर की विशेष सेल की ओर से जारी किया जाएगा.
नियमों का पालन करने पर दोबारा शुरू होगी सप्लाई
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली-पानी की सप्लाई हमेशा के लिए बंद नहीं होगी. संबंधित व्यक्ति जब कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करने का प्रमाण पत्र जमा करेगा, तब कनेक्शन दोबारा शुरू किया जा सकेगा. इसका मकसद लोगों को दंडित करना ही नहीं, बल्कि कचरा अलग करने और सही तरीके से निपटाने की आदत विकसित करना है.
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दिया है. छात्रों को थ्योरी के साथ इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है. शिक्षकों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा. कोर्ट का मानना है कि प्रशिक्षित छात्र अपने परिवार और आसपास के लोगों को कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक कर सकते हैं.
हर महीने होगी निगरानी और रिपोर्टिंग
कोर्ट के ये निर्देश भोपाल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए. मामला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के पालन से संबंधित था.
अदालत ने जिला शिक्षा विभागों को समय-समय पर ऑडिट कराने और उसकी रिपोर्ट जिला कलेक्टरों को देने को कहा है. अधिकारियों को कचरा जमा होने वाली जगहों की जियो-टैग फोटो और हर महीने की रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. इसके बाद रिपोर्ट जिला स्तर से राज्य सचिवों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों तक भेजी जाएगी.
