यूक्रेन की राजनीति में रूस के साथ जारी युद्ध के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में रक्षा मंत्री पद से हटाए गए मिखाइलो फेदोरोव ने युद्ध के दौरान ही राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग कर दी है। फेदोरोव का यह बयान राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के लिए अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
फेदोरोव ने 18 अगस्त को जारी करीब नौ मिनट के वीडियो संदेश में कहा कि यूक्रेन को लंबे समय तक चल रहे युद्ध के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए कानूनी, सुरक्षित और व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। उनका तर्क है कि रूस के साथ युद्ध को लोकतंत्र को रोकने का स्थायी कारण नहीं बनाया जा सकता।
फेदोरोव ने चुनाव की मांग क्यों उठाई?
फेदोरोव की मांग के पीछे सिर्फ चुनाव कराने का मुद्दा नहीं है, बल्कि यूक्रेन की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर उनकी गंभीर आपत्तियां भी हैं। उन्होंने अपने बयान में व्यवस्था में भ्रष्टाचार, बदलाव के प्रति प्रतिरोध और सरकार में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए। उनका कहना है कि युद्ध के बीच भ्रष्टाचार और कमजोर प्रशासन देश की लड़ाई को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
फेदोरोव ने सीधे तौर पर राष्ट्रपति जेलेंस्की का नाम लेकर हमला नहीं किया, लेकिन उनके बयान को मौजूदा सत्ता व्यवस्था के खिलाफ स्पष्ट राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि वह कुछ ही समय पहले सरकार से बाहर किए गए हैं।
जुलाई में रक्षा मंत्री पद से हटाए गए थे
मिखाइलो फेदोरोव ने जनवरी 2026 में यूक्रेन के रक्षा मंत्री का पद संभाला था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद जुलाई में उन्हें पद से हटा दिया गया। उनके कार्यकाल के दौरान रक्षा मंत्रालय में बड़े सुधारों और रक्षा खरीद व्यवस्था में बदलाव की बातें सामने आई थीं। उनके हटने के बाद यूक्रेन में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली।
फेदोरोव और सैन्य नेतृत्व के बीच मतभेदों की खबरें भी सामने आई थीं। उनके पद से हटने के बाद हुए घटनाक्रम में सैन्य कमांडर ओलेक्सांद्र सिरस्की को भी पद से हटाया गया। इससे फेदोरोव की राजनीतिक भूमिका और उनके समर्थकों की सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हुई।
जेलेंस्की के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?
यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण राष्ट्रपति चुनाव नहीं हो पाए हैं। 2024 में चुनाव होने थे, लेकिन रूस के साथ जारी युद्ध के बीच उन्हें टाल दिया गया। यूक्रेनी कानून के तहत मार्शल लॉ के दौरान चुनाव कराने पर रोक है। जेलेंस्की का कार्यकाल मई 2024 में समाप्त हो चुका है, लेकिन युद्धकालीन व्यवस्था के कारण चुनाव नहीं हुए।
फेदोरोव अब इसी मुद्दे को लोकतांत्रिक वैधता से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि युद्ध चाहे जितना लंबा चले, देश को लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने का रास्ता तलाशना चाहिए। हालांकि, चुनाव कराने में सुरक्षा, विस्थापित नागरिकों की भागीदारी और युद्धग्रस्त इलाकों में मतदान जैसी बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां मौजूद हैं।
क्या फेदोरोव खुद राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनेंगे?
फिलहाल फेदोरोव ने स्पष्ट रूप से यह घोषणा नहीं की है कि वह राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, उनके बयान को यूक्रेन की राजनीति में संभावित नए शक्ति केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। कुछ सर्वेक्षणों में उनका नाम संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों के बीच सामने आया है और उन्हें जेलेंस्की के लिए संभावित चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
उनकी मांग ऐसे समय आई है जब यूक्रेन की सरकार भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था को लेकर बढ़ते दबाव का सामना कर रही है। ऐसे में फेदोरोव का चुनाव का मुद्दा उठाना आने वाले समय में यूक्रेन की घरेलू राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या होगा?
फेदोरोव की मांग के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या युद्ध के बीच यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए कोई नया कानूनी और सुरक्षित तंत्र तैयार किया जा सकता है। फिलहाल युद्ध जारी है और चुनाव कराने से जुड़ी सुरक्षा तथा संवैधानिक चुनौतियां गंभीर हैं।
फेदोरोव का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद किसी बड़े यूक्रेनी राजनीतिक चेहरे की ओर से युद्ध के दौरान चुनाव कराने की इतनी स्पष्ट मांग पहली बार सामने आई है। इससे जेलेंस्की सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है और यूक्रेन की सत्ता राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना भी बढ़ गई है।
