Saturday, September 12, 2026
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रूस में 14 घंटे काम और सूखी रोटी…97 दिन बाद घर पहुंचे पिथौरागढ़ के दो भाई

by Sagar Sharma
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले दो सगे भाइयों ने बेहतर कमाई और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश जाने का फैसला किया था. उनकी मां ने करीब आठ लाख रुपये जुटाकर दोनों को रूस भेजा. उन्हें अच्छी नौकरी और 50 हजार रुपये महीने वेतन का भरोसा दिया गया था. लेकिन रूस पहुंचने के बाद दोनों भाइयों की मुश्किलें बढ़ गईं. आरोप है कि उनसे 14 घंटे तक काम कराया गया, खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं दिया गया और तय वेतन भी नहीं मिला. करीब 97 दिन तक वहां फंसे रहने के बाद दोनों भाई 11 अगस्त को सुरक्षित अपने घर लौटे.

ट्रैवल एजेंसी के भरोसे रूस पहुंचे थे दोनों भाई

पिथौरागढ़ के आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की विदेश में नौकरी करने के लिए एक ट्रैवल एजेंसी के संपर्क में आए थे. परिवार को उम्मीद थी कि रूस में नौकरी मिलने के बाद दोनों अच्छी कमाई कर सकेंगे. इसी भरोसे पर उनकी मां ने आठ लाख रुपये की व्यवस्था की और दोनों को विदेश भेज दिया.

रूस पहुंचने के बाद उन्हें कथित तौर पर पता चला कि जिस नौकरी और सुविधाओं का वादा किया गया था, वे उन्हें नहीं मिल रही थीं. दोनों भाइयों का कहना है कि उनसे लगातार अलग-अलग कारण बताकर पैसे काटे जाते थे. उन्हें 50 हजार रुपये मासिक वेतन देने की बात कही गई थी, लेकिन तीन महीने काम करने के बाद आनंद को केवल 17,500 रुपये ही मिले.

14 घंटे काम, खाने में सूखी रोटी और एक अंडा

आनंद के मुताबिक, उनसे रोज करीब 14 घंटे तक काम कराया जाता था. काम के बदले पर्याप्त वेतन नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ गई. उन्होंने बताया कि खाने के नाम पर उन्हें सूखी रोटी और एक अंडा दिया जाता था.

आनंद ने यह भी बताया कि उसी ट्रैवल कंपनी के स्थायी कर्मचारियों को करीब 70 हजार रुपये वेतन मिलता था. उन्हें ओवरटाइम का भुगतान और आने-जाने के लिए कैब जैसी सुविधाएं भी मिलती थीं, लेकिन दोनों भाइयों को इन सुविधाओं से वंचित रखा गया.

97 दिन बाद घर लौटे, परिवार ने ली राहत की सांस

रूस में करीब 97 दिन तक फंसे रहने के बाद आनंद और भूपेंद्र 11 अगस्त को उत्तराखंड स्थित अपने घर पहुंचे. दोनों के वापस आने पर परिवार ने राहत की सांस ली. हालांकि, रूस में बिताए मुश्किल दिनों की याद आज भी दोनों भाइयों को भावुक कर देती है.

परिवार ने दोनों की सुरक्षित वापसी में मदद के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है. साथ ही परिवार ने विदेश भेजने के नाम पर खर्च हुए आठ लाख रुपये वापस दिलाने की मांग भी की है. मामले ने विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को दिए जाने वाले झूठे वादों और ट्रैवल एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं.

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