Saturday, September 12, 2026
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26 दिन की बेटी को गोद में लेकर दिया इंटरव्यू, वर्षा पटेल बनीं DSP; संघर्ष और हौसले की मिसाल है कहानी

by Sagar Sharma
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Success Story: सपनों को पूरा करने की राह में मुश्किलें आती हैं, लेकिन जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाता, वही सफलता की नई कहानी लिखता है। मध्य प्रदेश की वर्षा पटेल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पारिवारिक जिम्मेदारियों, मुश्किल परिस्थितियों और प्रसव के बाद की शारीरिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने MPPSC परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की और DSP का पद प्राप्त किया। उनकी कहानी खास तौर पर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रही हैं।

मध्य प्रदेश के गांव से शुरू हुआ सफर

वर्षा पटेल मध्य प्रदेश के मैहर के पास स्थित भरेवा गांव की रहने वाली हैं। उनकी स्कूली शिक्षा और ग्रेजुएशन दमोह में हुआ। पढ़ाई के दौरान ही उनके परिवार में कई चुनौतियां सामने आईं। उनके पिता किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसका असर उनके करियर और शुरुआती प्रयासों पर भी पड़ा। इसके बावजूद वर्षा ने अपने लक्ष्य को पूरी तरह छोड़ा नहीं।

शादी के बाद पति ने किया तैयारी के लिए प्रेरित

वर्षा की शादी साल 2017 में हुई थी। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई और करियर के सपनों को जिंदा रखा। उनके पति ने उनकी क्षमता और पढ़ाई के प्रति लगन को देखते हुए उन्हें MPPSC की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया। ससुराल में भी परिस्थितियां आसान नहीं थीं। उनकी सास गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं और कोविड की दूसरी लहर के दौरान उनका निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच वर्षा ने अपनी तैयारी जारी रखी।

कई प्रयासों के बाद हासिल की बड़ी सफलता

वर्षा पटेल का MPPSC का सफर लगातार मेहनत और अनुभव से भरा रहा। उन्होंने कई प्रयास किए और इस दौरान कुल 5 मेन्स परीक्षाएं और 3 इंटरव्यू दिए। हर प्रयास ने उन्हें कुछ नया सिखाया और उनकी तैयारी को बेहतर बनाया। आखिरकार MPPSC 2024 में उन्होंने महिला वर्ग में रैंक-1 हासिल की और DSP बनने का सपना पूरा किया।

सिजेरियन डिलीवरी के 26 दिन बाद दिया इंटरव्यू

वर्षा की सफलता की कहानी का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा उनका इंटरव्यू है। परीक्षा में सफलता के बाद उनकी डिलीवरी हुई थी। इंटरव्यू की तारीख आने तक उनकी बेटी सिर्फ 26 दिन की थी। सिजेरियन सर्जरी के बाद वर्षा को चलने और बैठने में भी काफी परेशानी हो रही थी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू देने का फैसला किया।

इंटरव्यू के दिन वह अपनी नवजात बेटी श्रीजा को गोद में लेकर आयोग पहुंचीं। इंटरव्यू में समय लगना था और वह अपनी सिर्फ 26 दिन की बेटी को अकेले नहीं छोड़ सकती थीं। इसलिए उन्होंने बेटी को अपने साथ रखा और शारीरिक परेशानी के बावजूद पूरे आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू का सामना किया।

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

वर्षा पटेल की कहानी यह संदेश देती है कि मां बनने के बाद भी महिलाएं अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। उनके लिए परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं रहीं, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ाए।

वर्षा का संदेश है—“इरादे हों तो सब मुमकिन है।” उनका मानना है कि लक्ष्य के प्रति ईमानदारी, सकारात्मक सोच और लगातार मेहनत से कठिन रास्तों को भी पार किया जा सकता है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी बेटी को भी देती हैं और दूसरे अभ्यर्थियों को सलाह देती हैं कि जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय उन्हें स्वीकार करें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें

वर्षा पटेल की कहानी सिर्फ एक सरकारी पद हासिल करने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार, मातृत्व और दृढ़ संकल्प के बीच अपने सपनों को जिंदा रखने की प्रेरणादायक मिसाल है।

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