तमिलनाडु की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बुधवार का दिन अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) गठबंधन सरकार अपना पहला राज्य बजट विधानसभा में पेश करेगी। वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन सुबह 10 बजे वित्त वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करेंगे। नई सरकार के गठन के बाद यह पहला पूर्ण बजट है, इसलिए आम जनता से लेकर राजनीतिक दलों तक सभी की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं।
इस बजट से सरकार की आगामी योजनाओं और विकास की प्राथमिकताओं की झलक मिलने की उम्मीद है। विधानसभा चुनाव के दौरान TVK ने कई जनकल्याणकारी वादे किए थे, जिनमें सामाजिक कल्याण और विकास से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं शामिल थीं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार इन वादों को पूरा करने की दिशा में अपनी वित्तीय रणनीति और रोडमैप भी सामने रख सकती है। हालांकि इन योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होगी।
बजट पेश होने से पहले राज्य सरकार ने तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया था। इस दस्तावेज में दावा किया गया कि सार्वजनिक उपक्रमों के कर्ज को शामिल करने पर राज्य पर कुल 13.18 लाख करोड़ रुपये का बकाया ऋण है।
इसके साथ ही सरकार ने राज्य में राजस्व में गिरावट को गंभीर चिंता का विषय बताया। श्वेत पत्र के अनुसार, अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु के स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू (SOTR) की हिस्सेदारी में कमी आई है, जिससे सरकारी योजनाओं और आम लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
इसी बीच बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष के नेता को बजट सत्र के दौरान विधानसभा से दूर रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है।
ऐसे में वित्तीय चुनौतियों और राजनीतिक हलचल के बीच पेश होने वाला TVK सरकार का पहला बजट तमिलनाडु की भविष्य की आर्थिक दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
