नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर खुली बहस की चुनौती देकर देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को किसी भी मंच और किसी भी समय आमने-सामने चर्चा करने का न्योता दिया है। उनके इस बयान पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने राहुल गांधी को सोशल मीडिया पर चुनौती देने के बजाय संसद में बहस करने की सलाह दी। इस बयानबाजी के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के सामने रखे कई अहम सवाल
राहुल गांधी ने 2 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेशी मदद के सहारे सत्ता में आने और बने रहने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश की आर्थिक व्यवस्था को विदेशी ताकतों का समर्थन प्राप्त है। इन आरोपों के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती दी थी।
3 नवंबर को राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी पसंद का कोई भी मंच और स्थान चुन सकते हैं। राहुल के मुताबिक, इस चर्चा में देश की आर्थिक व्यवस्था, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, अडानी मामले और जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि अमेरिका के साथ समझौता इतनी जल्दी कैसे हुआ और इसमें कैबिनेट को कितना विश्वास में लिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष पर विदेशी ताकतों से संबंध रखने के आरोप लगाते हैं, इसलिए इन सभी मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए।
निर्मला सीतारमण ने संसद को बताया बहस का सही मंच
राहुल गांधी की चुनौती पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री से बहस के लिए मंच चुनने को कह रहे हैं, जबकि उनके पास पहले से ही एक लोकतांत्रिक मंच मौजूद है और वह संसद है।सीतारमण ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी सोशल मीडिया पर बहस की चुनौती देते समय जितना उत्साह दिखाते हैं, उतना उत्साह संसद में चर्चा के दौरान क्यों नहीं दिखाते? उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले ही SIR और EVM जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की पेशकश कर चुके हैं।
वित्त मंत्री ने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य और सबूत पेश करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरोपों की लंबी सूची बना देने से किसी का पक्ष मजबूत नहीं होता
अमित शाह और पीयूष गोयल ने भी साधा निशाना
इस राजनीतिक विवाद में गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अमित शाह ने SIR और EVM पर विशेष चर्चा की पेशकश की थी। वहीं पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए वीडियो साझा किया और उनकी बहस की चुनौती को लेकर कटाक्ष किया।
गोयल ने राहुल गांधी की राजनीतिक बयानबाजी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह 2014 से खुद से ही बहस कर रहे हैं।
संसद में बहस होगी या जारी रहेगा सियासी टकराव
राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण के बीच हुई इस बयानबाजी ने एक बार फिर संसद और सोशल मीडिया पर राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस प्रधानमंत्री से सीधे सवालों के जवाब मांग रही है, वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष को अपने सवाल और आरोप संसद में तथ्यों के साथ रखने चाहिए
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौती स्वीकार किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर चर्चा का विषय बनता है या राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है।
