नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: देश में दवाओं, मेडिकल उपकरणों और कॉस्मेटिक उत्पादों के आयात की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयात से जुड़े अधिकृत प्रवेश और क्लीयरेंस केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत देश के अलग-अलग राज्यों में 10 नए स्थानों को अधिकृत आयात केंद्रों की सूची में शामिल करने की तैयारी है। सरकार के इस कदम से स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों, आयातकों और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मंत्रालय ने इसके लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 43A में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य आयात प्रक्रिया को सुगम बनाना, परिवहन लागत कम करना और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उत्पादों की सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाना है।
पांच राज्यों में विकसित होंगे नए आयात केंद्र
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक में नए आयात केंद्रों को अधिकृत सूची में शामिल किया जाएगा। इनमें आठ इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल है।
प्रस्तावित स्थानों में हरियाणा के सोनीपत, पियाला और गढ़ी हरसरू को शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के दादरी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी इस योजना में जगह देने का प्रस्ताव है। गुजरात के गांधीनगर/मुंद्रा, तेलंगाना के हैदराबाद स्थित सनथनगर और थिम्मापुर तथा कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित व्हाइटफील्ड को भी नई सूची में शामिल करने की तैयारी है।इसके अलावा कर्नाटक के बोम्मासांद्रा स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र को भी अधिकृत केंद्र बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
ड्रग्स रूल्स 1945 में होगा संशोधन
दरअसल, ड्रग्स रूल्स, 1945 का नियम 43A यह निर्धारित करता है कि विदेश से आने वाली दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य उत्पादों को किन बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सड़क मार्गों और अन्य अधिकृत स्थानों से भारत में प्रवेश की अनुमति होगी।अभी आयातकों के पास सीमित अधिकृत केंद्रों के विकल्प हैं। ऐसे में कई बार सामान को क्लीयरेंस के लिए लंबी दूरी तक पहुंचाना पड़ता है। नए केंद्रों को मंजूरी मिलने से यह प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
कारोबारियों को मिलेंगे ये बड़े फायदे
सरकार के इस प्रस्ताव से मेडिकल उपकरणों और दवाओं के आयात से जुड़े कारोबारियों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है।
परिवहन खर्च में कमी: आयातकों को अपने गोदाम और वितरण केंद्रों के नजदीक सामान छुड़ाने का विकल्प मिलेगा।समय की बचत: लंबी दूरी तक सामान पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है।सप्लाई चेन मजबूत होगी: मेडिकल उपकरणों और जरूरी दवाओं की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।कारोबार में आसानी: आयात से जुड़ी लॉजिस्टिक्स और संचालन संबंधी परेशानियां कम हो सकती हैं।उपलब्धता में सुधार: स्वास्थ्य क्षेत्र में जरूरी उत्पादों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी मिलेगा महत्व
उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस प्रस्ताव में शामिल करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अधिकृत होने से हवाई मार्ग के जरिए दवाओं के आयात के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकता है। इससे उत्तर भारत में स्वास्थ्य उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
अभी अंतिम मंजूरी का इंतजार
ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल यह प्रस्तावित संशोधन है, जिसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने संबंधित पक्षों से मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इसके लिए मसौदा अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद 30 दिनों का समय दिया गया है।
कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल भारत में मेडिकल उपकरणों, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य उत्पादों के आयात को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो देश के विभिन्न हिस्सों में आयात से जुड़े कारोबारियों को बेहतर क्लीयरेंस सुविधाएं मिल सकेंगी।
