मुंबई, 13 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र के वरिष्ठ IAS अधिकारी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अपने तबादले को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि न तो उनका FDA से तबादला हुआ है और न ही उन्होंने आयुक्त पद छोड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि असुरक्षित और मिलावटी खाद्य पदार्थों के साथ नकली तथा घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के खिलाफ विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी
मुंढे का यह बयान उस समय सामने आया, जब महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समिति में उन्हें सचिव नियुक्त किया गया। इस नई जिम्मेदारी की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में उनके FDA पद से हटाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
सोशल मीडिया पर मुंढे ने खुद दी सफाई
तुकाराम मुंढे ने 12 अक्टूबर की रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वह महाराष्ट्र FDA के आयुक्त के रूप में काम कर रहे हैं और मिलावटी खाद्य पदार्थों तथा नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ विभाग का अभियान जारी है।उनके बयान का उद्देश्य पद को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर करना था। मुंढे ने साफ किया कि MPSC जांच समिति में नई जिम्मेदारी मिलने का अर्थ FDA आयुक्त पद से हटना नहीं है। फिलहाल, उनके बयान के अनुसार, वह दोनों जिम्मेदारियों से जुड़े कार्यों को संभाल रहे हैं।
मिलावटखोरों और नकली दवाओं पर सख्ती
महाराष्ट्र में FDA की जिम्मेदारी खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता तथा सुरक्षा से जुड़े नियमों को लागू करना है। विभाग खाद्य कारोबारों का निरीक्षण करता है, नमूने एकत्र करता है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई कर सकता है।मुंढे के कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर विभाग की कार्रवाई चर्चा में रही है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में निरीक्षण तथा छापेमारी के जरिए असुरक्षित खाद्य सामग्री, मिलावट और लाइसेंस संबंधी उल्लंघनों पर ध्यान दिया गया है।इस अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करना है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई का आधार जांच, उपलब्ध साक्ष्य और लागू कानूनी प्रावधान होते हैं।
कारोबारियों में सख्ती को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया
FDA की कार्रवाई को लेकर उपभोक्ताओं और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रही हैं। कई उपभोक्ता खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निरीक्षण और नियमों के पालन को जरूरी मानते हैं। वहीं, कुछ रेस्टोरेंट संचालकों और कारोबारियों ने विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। कुछ मामलों में नियामकीय फैसलों को कानूनी चुनौती भी दी गई है।ऐसे में विभाग के सामने एक ओर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर यह भी आवश्यक है कि कार्रवाई नियमों के अनुसार, पारदर्शी तरीके से और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाए।
MPSC जांच समिति में भी मिली अहम जिम्मेदारी
मुंढे को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति का सचिव बनाया गया है। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिलीप भोसले करेंगे। इस समिति का गठन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बाद किया गया है।
समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। जांच में आयोग के मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों के कार्यकाल तथा भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं पर विचार किया जाएगा।
इस नई जिम्मेदारी के कारण मुंढे की प्रशासनिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। अब उनके सामने FDA में खाद्य एवं औषधि सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ MPSC से संबंधित जांच कार्य भी रहेगा।
आगे भी जारी रहेगी मिलावट के खिलाफ लड़ाई
तुकाराम मुंढे के स्पष्टीकरण से फिलहाल उनके तबादले को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह महाराष्ट्र FDA के आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं और असुरक्षित भोजन तथा नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि FDA का अभियान आने वाले दिनों में किस तरह आगे बढ़ता है और MPSC जांच समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है। दोनों मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।
