Thursday, November 5, 2026
Thursday, November 5, 2026
Home विदेशचुनावी झटके के बीच ट्रंप का ईरान पर आर्थिक प्रहार! भारतीय कंपनियों और तुर्किये की फर्म पर अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, जानें पूरा मामला

चुनावी झटके के बीच ट्रंप का ईरान पर आर्थिक प्रहार! भारतीय कंपनियों और तुर्किये की फर्म पर अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, जानें पूरा मामला

by Sagar Sharma
0 comments

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत और तुर्किये से जुड़ी कंपनियों तथा कुछ व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह कार्रवाई ईरान के तेल कारोबार और विमानन क्षेत्र को कथित तौर पर सहायता पहुंचाने के आरोप में की है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की है और रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है।

इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है कि क्या ट्रंप प्रशासन चुनावी नतीजों के बावजूद ईरान के खिलाफ अपनी सख्त नीति जारी रखना चाहता है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट रूप से इन प्रतिबंधों को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा बताया है।

भारतीय कारोबारी और उनकी कंपनियां अमेरिकी निशाने पर

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारत में रहने वाले कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि दोनों ने एक बड़े नेटवर्क के माध्यम से ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार को सहायता पहुंचाई।अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क ने समुद्री जहाजों को गलत पहचान और फर्जी समुद्री प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। इसके जरिए प्रतिबंधित जहाज कथित तौर पर ईरानी पेट्रोलियम का परिवहन जारी रख सके।

इस कार्रवाई में दो अन्य भारतीय नागरिकों अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह का नाम भी शामिल किया गया है। इनके अलावा सुनील शर्मा से जुड़ी नौ भारतीय संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

फर्जी समुद्री दस्तावेजों के जरिए कैसे होता था कारोबार?

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि संबंधित नेटवर्क ने कई ऐसी वेबसाइट तैयार की थीं, जिनके माध्यम से कुछ देशों की अधिकृत समुद्री पंजीकरण सेवाओं का प्रतिनिधित्व करने का झूठा दावा किया गया।इनमें गुयाना, इस्वातिनी और लाओस जैसे देशों के नाम शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि इन वेबसाइटों के जरिए जहाजों को पंजीकरण, समुद्री पहचान और वर्गीकरण से संबंधित प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे।

ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल जहाजों की वास्तविक पहचान छिपाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जा सकता था। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस नेटवर्क ने ईरान के तेल निर्यात को जारी रखने में मदद की।

तुर्किये की कंपनी पर भी गिरी अमेरिकी कार्रवाई की गाज

अमेरिका ने केवल भारतीय कंपनियों तक अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी। तुर्किये स्थित फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक (Fugo Ground Services Inc) को भी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया है।अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान की प्रतिबंधित विमानन व्यवस्था को सेवाएं उपलब्ध कराईं। इसमें ईरानी एयरलाइंस को ग्राउंड हैंडलिंग और हवाई अड्डों से संबंधित सहायता देना शामिल बताया गया है।

अमेरिका के अनुसार, जिन ईरानी विमानन कंपनियों को सेवाएं दी गईं, उनमें ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, ताबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं।

ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत हुई कार्रवाई

इन प्रतिबंधों को ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री से होने वाली कमाई को सीमित करना और उसके आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाना है।अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि ईरान की मदद करने वाले व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है। अमेरिका का मानना है कि प्रतिबंधों से ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और अन्य सेवाओं का कारोबार करना मुश्किल होगा।

चुनावी हार और ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की सफलता के बाद ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान के साथ जारी संघर्ष और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को भी चुनावी नतीजों से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि, भारत और तुर्किये से जुड़ी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को सीधे चुनावी हार की प्रतिक्रिया कहना सही नहीं होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों की नीति को जारी रखे हुए है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का भारत, तुर्किये और अमेरिका के कारोबारी संबंधों पर कितना असर पड़ता है।

Author

You may also like