अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओमान को दी गई सैन्य कार्रवाई की धमकी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. अगर अमेरिका और ओमान के बीच तनाव बढ़ता है और इसका असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री कारोबार प्रभावित हो सकता है. होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल है. भारत ने पिछले कुछ महीनों में इस रास्ते पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश जरूर की है, लेकिन LPG और ऊर्जा आयात के मामले में जोखिम अभी भी काफी बड़ा है. तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल, महंगाई और शिपिंग खर्च भी बढ़ सकता है.
ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 अगस्त को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ओमान को लेकर कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर ओमान ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की अमेरिकी कोशिश में बाधा बनता है, तो अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए तय 60 दिन की समयसीमा बिना किसी बड़े समझौते के खत्म हो चुकी है.
अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ सकता है. यह रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है.
भारत ने तेल के लिए घटाई निर्भरता
भारत ने हाल के महीनों में होर्मुज के रास्ते आने वाले कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम की है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत के करीब 70 फीसदी कच्चे तेल का आयात होर्मुज से बाहर के रास्तों से आने लगा था. पहले यह आंकड़ा करीब 55 फीसदी था.
मई 2026 तक होर्मुज से जुड़े स्रोतों की हिस्सेदारी भारत के कच्चे तेल आयात में करीब 25 फीसदी रह गई. LPG के मामले में भी निर्भरता जनवरी के 87 फीसदी से घटकर मई में करीब 38 फीसदी हो गई. इसके बावजूद LPG को लेकर भारत के लिए जोखिम बना हुआ है, क्योंकि देश अपनी खपत का करीब 60 फीसदी LPG आयात करता है.
तेल महंगा हुआ तो बढ़ेगी महंगाई
अगर होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है. भारत हर साल करीब 1.8 से 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के सालाना आयात बिल पर करीब 2 अरब डॉलर तक अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
इसका असर पेट्रोल-डीजल के अलावा परिवहन और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. वहीं LNG की सप्लाई और समुद्री व्यापार भी प्रभावित होने का खतरा है.
अगर होर्मुज के साथ लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र भी असुरक्षित होता है, तो भारत और यूरोप के साथ-साथ भारत-मध्य पूर्व व्यापार पर दोहरा दबाव पड़ेगा. शिपिंग लागत बढ़ने से आयात-निर्यात महंगा हो सकता है. कुल मिलाकर, ओमान को लेकर बढ़ता सैन्य तनाव भारत के लिए तेल-गैस महंगाई, बढ़ते आयात बिल, महंगी शिपिंग और रुपये पर दबाव जैसी आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकता है.
