नई दिल्ली: भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिशों के बीच Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने निवेश, बाजार की मांग और बेहतर प्रबंधन को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि भारत के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और व्यावहारिक निवेश रणनीति जरूरी होगी।
13 अक्टूबर 2026 को Bloomberg New Economy Forum में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर को भारत के औद्योगिक और तकनीकी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, देश के पास कुशल प्रतिभा, बड़ा घरेलू बाजार और वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनने की क्षमता जैसे मजबूत आधार हैं। हालांकि, कंपनियों को निवेश बढ़ाने से पहले बाजार की वास्तविक मांग और परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता का आकलन करना होगा।
भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में क्या हैं चुनौतियां?
सेमीकंडक्टर यानी चिप्स का इस्तेमाल कारों, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टेलीकॉम उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सिस्टम में होता है। इनकी बढ़ती जरूरत के कारण कई देश घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की अच्छी स्थिति में है, लेकिन केवल उत्पादन क्षमता तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि बाजार में कितनी मांग है, निवेश व्यावसायिक रूप से कितना व्यवहार्य है और परियोजनाओं का प्रबंधन किस तरह किया जाएगा।
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश और लंबी अवधि की योजना की जरूरत होती है। इसलिए मांग का सही अनुमान और परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन इस क्षेत्र की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ग्लोबल कंपनियों के साथ सहयोग क्यों जरूरी?
भारत को सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी की जरूरत होगी। इससे तकनीक, विशेषज्ञता और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।
चंद्रशेखरन के मुताबिक, भारत की प्रतिभा और घरेलू बाजार उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में योगदान देने का अवसर प्रदान करते हैं। लेकिन इस क्षमता को वास्तविक उत्पादन और व्यावसायिक सफलता में बदलने के लिए सही तकनीक, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच तालमेल जरूरी है।
गुजरात और असम में टाटा के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट
Tata Group भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। इनमें गुजरात के धोलेरा में चिप फैब्रिकेशन परियोजना और असम के जगीरोड में सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग सुविधा शामिल हैं।
धोलेरा परियोजना में Tata Electronics डच कंपनी ASML के साथ सहयोग कर रही है। वहीं, असम की जगीरोड सुविधा में प्रतिदिन 4.8 करोड़ चिप्स तक उत्पादन की अपेक्षित क्षमता बताई गई है। यह सुविधा ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और AI आधारित उपकरणों जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई जा रही है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण के अलग-अलग चरणों की क्षमता विकसित करना और वैश्विक सप्लाई चेन में देश की भागीदारी बढ़ाना है।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है चिप मैन्युफैक्चरिंग?
सेमीकंडक्टर की उपलब्धता ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम और AI जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित होने से भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक भागीदारी का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल फैक्ट्रियों का निर्माण पर्याप्त नहीं होगा। बाजार की मांग, तकनीकी विशेषज्ञता, निवेश की व्यवहार्यता और प्रभावी प्रबंधन भी जरूरी होंगे।
चंद्रशेखरन की टिप्पणियां इस बात पर जोर देती हैं कि भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को टिकाऊ औद्योगिक विकास में बदलने के लिए वैश्विक साझेदारी और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य निवेश रणनीति अहम भूमिका निभाएंगी।
