Sunday, September 13, 2026
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प्रज्वल रेवन्ना की जेल बैरक से मिला एंड्रॉयड फोन, लापरवाही पर सहायक जेल अधीक्षक सस्पेंड

by Sagar Sharma
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बेंगलुरु के परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में बंद पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद हुआ है। केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की टीम ने मंगलवार को जेल में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान यह फोन जब्त किया। इस मामले में जेल प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है, जिसके बाद एक सहायक जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस महानिदेशक (जेल एवं सुधार सेवाएं) आलोक कुमार ने बताया कि CCB ने हाई-सिक्योरिटी जेल में करीब चार से पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान हाई-प्रोफाइल कैदियों समेत अन्य बैरकों की भी जांच की गई। प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से एंड्रॉयड फोन मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया है।

पहले भी हुई थी बैरक की तलाशी

जेल अधिकारियों ने 6 अगस्त को भी प्रज्वल रेवन्ना की बैरक की तलाशी ली थी, लेकिन उस समय कोई प्रतिबंधित सामान बरामद नहीं हुआ था। इसके कुछ दिनों बाद हुई CCB की छापेमारी में मोबाइल फोन मिलने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

आलोक कुमार के मुताबिक, CCB ने परप्पना अग्रहारा थाने में शिकायत दर्ज कराई है और मामले में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। घटना की विस्तृत जांच भी की जा रही है।

जेल अधिकारी पर गिरी गाज

पुलिस महानिदेशक (दक्षिण) की रिपोर्ट के आधार पर सहायक अधीक्षक इरन्ना रंगापुर को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया गया है। वहीं, बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, 11 अगस्त की तलाशी में मोबाइल फोन के अलावा कोई अन्य प्रतिबंधित सामान नहीं मिला।

मई 2024 में हुई थी गिरफ्तारी

प्रज्वल रेवन्ना को यौन उत्पीड़न के मामलों में मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में वह दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराए गए। अगस्त 2025 में बेंगलुरु की विशेष अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में बंद हैं।

जेल प्रशासन अब यह भी पता लगाने में जुटा है कि मोबाइल फोन रेवन्ना तक कैसे पहुंचा और वह इसका इस्तेमाल कितने समय से कर रहे थे। जांच एजेंसियां फोन की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि इससे किसी से संपर्क किया गया था या नहीं। इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की नियमित तलाशी को लेकर भी अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

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