Thursday, October 29, 2026
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दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ, पीएम मोदी बोले—युवा शक्ति देश के भविष्य की आधारशिला

by Sagar Sharma
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए युवाओं को देश की प्रगति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार बताया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीतियों के केंद्र में युवा हैं। देश की युवा आबादी को अवसर, कौशल और सही दिशा उपलब्ध कराना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस सम्मेलन का महत्व भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक समाज में युवाओं की भूमिका पर चर्चा से जुड़ा है। कार्यक्रम के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।

युवा शक्ति को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं की क्षमता और देश के विकास में उनके योगदान को रेखांकित किया। भारत की बड़ी युवा आबादी देश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, विज्ञान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी से विकास को नई गति मिल सकती है।

उन्होंने युवाओं को केवल भविष्य की उम्मीद के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान में देश के परिवर्तनकारी प्रयासों के सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की आवश्यकता पर बल दिया। युवाओं को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने, जिम्मेदारी निभाने और राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना इस दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर जोर

चिन्मय मिशन की परंपरा भारतीय दर्शन, वेदांत और आध्यात्मिक शिक्षा के प्रसार से जुड़ी रही है। इसके संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने भारतीय ज्ञान परंपरा को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया था। इसी विरासत से जुड़े कार्यक्रमों में आत्मचिंतन, नैतिकता, सेवा और जीवन मूल्यों जैसे विषयों को विशेष स्थान मिलता है।

ऐसे आयोजनों का उद्देश्य आध्यात्मिक विचारों को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन, सामाजिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत विकास से जोड़ना भी है। युवाओं के संदर्भ में यह दृष्टिकोण अनुशासन, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और कर्तव्यबोध जैसे गुणों को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है।

विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश में डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, कौशल विकास और नए व्यवसायों के विस्तार ने युवाओं के लिए संभावनाओं के अनेक क्षेत्र खोले हैं। हालांकि, रोजगार के अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों पर लगातार काम करना भी आवश्यक है।

सरकारी नीतियों में युवाओं को प्राथमिकता देने का उद्देश्य उन्हें अपनी प्रतिभा के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना और विकास की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। युवा जब अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता का उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान में करते हैं, तो उसका लाभ व्यापक स्तर पर समाज को मिलता है।

सम्मेलन का व्यापक संदेश

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच संवाद का अवसर प्रदान करते हैं। इनमें आध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को एक साथ समझने का प्रयास किया जाता है।

प्रधानमंत्री के संबोधन का केंद्रीय संदेश युवाओं की शक्ति, उनकी आकांक्षाओं और देश के भविष्य के बीच संबंध को रेखांकित करता है। भारत की प्रगति के लिए जरूरी है कि युवाओं को शिक्षा, कौशल और नवाचार के पर्याप्त अवसर मिलें तथा वे अपनी क्षमता का उपयोग देश और समाज के हित में कर सकें।

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