नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आपदा के तीन दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। कई इलाकों में भारी मात्रा में मलबा जमा है और राहत एवं बचाव दल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। इसी दौरान मलबे से शव बरामद होने का सिलसिला जारी है। हादसे में अब तक 469 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
कई देशों के नागरिक अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 30 से अधिक देशों के नागरिकों के लापता होने की बात सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की बताई जा रही है। करीब 288 भारतीयों के लापता होने की जानकारी ने चिंता और बढ़ा दी है। लापता लोगों के परिजन लगातार अपने रिश्तेदारों की तलाश और सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।
मलबे में तब्दील हुए कई इलाके
बाढ़ के तेज बहाव ने रास्तों, पुलों और कई बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। पानी उतरने के बाद सामने आए मलबे ने नुकसान की भयावह तस्वीर दिखाई है। राहतकर्मी जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर लोगों और शवों की तलाश कर रहे हैं।
लापता लोगों की तलाश में जुटीं टीमें
बचाव अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ सुरक्षा बलों और अन्य एजेंसियों की टीमें भी लगी हुई हैं। प्राथमिकता उन लोगों को खोजने की है, जिनके अब भी जीवित होने की संभावना है। इसके साथ ही बरामद शवों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उनके परिवारों को सूचना दी जा सके।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार और परिवहन व्यवस्था बाधित होने के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां भी राहत कार्य में बाधा डाल रही हैं।
परिवारों की बढ़ती चिंता
लापता नागरिकों के परिवारों के लिए हर गुजरता घंटा चिंता बढ़ा रहा है। कई परिवार प्रशासन और संबंधित दूतावासों से संपर्क कर अपने परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, बचाव दल लगातार नए इलाकों में तलाशी अभियान आगे बढ़ा रहे हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा की यह आपदा एक बड़े मानवीय संकट में बदल चुकी है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे या लापता लोगों तक पहुंचना है। आने वाले दिनों में राहत एवं बचाव अभियान के दौरान स्थिति की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
