सोनीपत। मुरथल के ढाबे लंबे समय से अपने स्वादिष्ट परांठों के लिए देशभर में मशहूर हैं। लेकिन अब यहां का अनुभव सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रह गया है। मुरथल के कुछ ढाबों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए तकनीक और मनोरंजन का अनोखा मेल तैयार किया है। यहां कहीं टॉय ट्रेन के जरिए टेबल तक खाना पहुंच रहा है, तो कहीं रोबोट ग्राहकों को खाना सर्व करते नजर आ रहे हैं। हाईटेक सर्विस का यह अंदाज खासकर बच्चों और युवाओं को काफी पसंद आ रहा है।
टेबल तक खाना लेकर पहुंचती है टॉय ट्रेन
मुरथल के रेशम ढाबे पर ग्राहकों के लिए टॉय ट्रेन सर्विस आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई है। ढाबे में 20-20 की पंक्ति में करीब 40 टेबल लगाई गई हैं। किचन की दीवार के साथ लंबी पटरियां बनाई गई हैं, जो सीधे ग्राहकों की टेबल यानी प्लेटफॉर्म तक पहुंचती हैं।
किचन के अंदर से संबंधित टेबल का नंबर दबाते ही टॉय ट्रेन पटरी पर चल पड़ती है और खाना लेकर सीधे उसी टेबल के पास पहुंच जाती है। खाने के साथ इस तरह का अनुभव ग्राहकों के लिए किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के दृश्य जैसा लगता है। यही वजह है कि लोग इस सर्विस का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं।
वेटर की जगह रोबोट कर रहे खाना सर्व
मुरथल के हाईटेक ढाबों में अब रोबोटिक डाइनिंग भी देखने को मिल रही है। कुछ जगहों पर रोबोट ग्राहकों की टेबल तक खाना पहुंचाते हैं। कमांड के जरिए रोबोट को निर्देश दिया जाता है और वह खाना लेकर ग्राहक तक पहुंचता है।
इस तरह की रोबोटिक सर्विस पारंपरिक ढाबे के अनुभव को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है। बच्चों के लिए यह खास तौर पर आकर्षण का केंद्र बन गई है, जबकि युवा रोबोट के साथ वीडियो और तस्वीरें लेना पसंद कर रहे हैं।
डिजिटल पेमेंट और हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा
मुरथल के ढाबों में सिर्फ खाना परोसने का तरीका ही आधुनिक नहीं हुआ है। यहां डिजिटल पेमेंट के लिए क्यूआर कोड की सुविधा भी उपलब्ध है। साथ ही कई ढाबों में हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा दी जा रही है। इससे ये पारंपरिक ढाबे नई पीढ़ी की जरूरतों के मुताबिक खुद को बदलते नजर आ रहे हैं।
परांठे आज भी मुरथल की पहचान
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद मुरथल के ढाबों की सबसे बड़ी पहचान आज भी उनके परांठे ही हैं। यहां आलू, प्याज, गोभी, मूली और मेथी जैसे पारंपरिक परांठों के साथ कई तरह की वैरायटी उपलब्ध है। मौसम के हिसाब से सीजनल परांठे भी ग्राहकों को पसंद आते हैं।
इसके अलावा तंदूरी परांठा भी काफी लोकप्रिय है। कम मक्खन पसंद करने वाले ग्राहक इसे एक विकल्प के तौर पर चुनते हैं। हालांकि मुरथल में अब सिर्फ परांठे ही नहीं, बल्कि साउथ इंडियन, चाइनीज और कॉन्टिनेंटल व्यंजन भी मिलते हैं।
विशाल परांठा बना पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
रेशम ढाबे का किंग साइज परांठा भी लोगों के बीच खास चर्चा का विषय है। इसे एक विशाल थाली में परोसा जाता है। इसके साथ दाल, सब्जियां, रायता, खीर, सलाद, मिठाई और पापड़ समेत करीब 14 कटोरियां रखी जाती हैं।
इस थाली की खासियत सिर्फ इसका आकार और खाना ही नहीं, बल्कि इसे परोसने का अंदाज भी है। जब कोई ग्राहक इस विशाल परांठे का ऑर्डर करता है तो एक वेटर बड़ी थाली लेकर चलता है, जबकि दूसरा वेटर आगे-आगे घंटी बजाते हुए आता है। इस शाही अंदाज में खाना परोसने का दृश्य लोगों को खूब आकर्षित करता है।
करीब 1100 रुपये की यह थाली पूरे परिवार के लिए पर्याप्त बताई जाती है। कई ग्राहक खाने से ज्यादा इस अनोखे अनुभव को कैमरे में कैद करने में व्यस्त नजर आते हैं।
मुरथल के ढाबों में स्वाद, परंपरा और तकनीक का यह मेल अब इन्हें सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि एक अलग तरह के अनुभव और मनोरंजन का केंद्र भी बना रहा है।
