भारत में LPG यानी रसोई गैस की सप्लाई व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने करीब 1,800 किलोमीटर नई LPG पाइपलाइन बिछाने की मंजूरी दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग ₹7,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसका मकसद LPG की लंबी दूरी तक सड़क के जरिए होने वाली ढुलाई पर निर्भरता कम करना और देश में गैस की सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
छह राज्यों से होकर गुजरेगा नया LPG नेटवर्क
नई पाइपलाइन परियोजनाओं का नेटवर्क तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा जैसे छह राज्यों को जोड़ेगा। इन पाइपलाइनों को GAIL (India) Limited द्वारा विकसित किया जाएगा। पूरा नेटवर्क तैयार होने के बाद देश का PNGRB-अधिकृत कॉमन कैरियर LPG पाइपलाइन नेटवर्क करीब 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा। यानी नेटवर्क में करीब 23.5 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
तीन बड़े कॉरिडोर से बदलेगी गैस की सप्लाई
नई परियोजना को तीन प्रमुख पाइपलाइन कॉरिडोर में बांटा गया है। पहला कॉरिडोर तेलंगाना के चेरलापल्ली से महाराष्ट्र के नागपुर तक होगा, जिसकी लंबाई करीब 556 किलोमीटर है।
दूसरा कॉरिडोर महाराष्ट्र के शिक्रापुर से हुबली और गोवा तक जाएगा। इसकी लंबाई लगभग 633 किलोमीटर होगी।
वहीं तीसरा कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी से उत्तराखंड के सितारगंज तक करीब 611 किलोमीटर लंबा होगा। इन तीनों परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 1,800 किलोमीटर है।
अभी ट्रकों से होती है लंबी दूरी की ढुलाई
भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और LPG की बड़ी मात्रा समुद्री तटों के जरिए देश में आती है। इसके बाद इसे अलग-अलग इलाकों में पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग और LPG टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है। लंबी दूरी तक सड़क से LPG पहुंचाने में समय, लॉजिस्टिक्स और ट्रैफिक जैसी कई चुनौतियां होती हैं। नई पाइपलाइन व्यवस्था इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है।
सप्लाई होगी ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद
पाइपलाइन नेटवर्क बढ़ने से LPG को बड़े सप्लाई केंद्रों से मांग वाले क्षेत्रों तक लगातार और व्यवस्थित तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। इससे सड़क पर LPG टैंकरों की आवाजाही कम हो सकती है और सप्लाई चेन में लचीलापन बढ़ेगा
विशेषज्ञों के मुताबिक, पाइपलाइन नेटवर्क का एक फायदा यह भी है कि इसमें कुछ मात्रा में गैस को सिस्टम के भीतर ही लगातार उपलब्ध रखा जा सकता है, जिससे अचानक सप्लाई में रुकावट आने की स्थिति में व्यवस्था को संभालने में मदद मिल सकती है।
देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा फायदा
सरकार और नियामक के लिए यह परियोजना सिर्फ पाइपलाइन बिछाने का काम नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और LPG लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खासकर तब, जब भारत में LPG की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है और आयातित गैस को तटीय क्षेत्रों से देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाना पड़ता है।
हालांकि, इन पाइपलाइनों के निर्माण, सुरक्षा परीक्षण और संचालन में समय लगेगा। इनके पूरा होने के बाद ही इनके वास्तविक लाभ पूरी तरह सामने आएंगे। लेकिन करीब 1,800 किलोमीटर के इस विस्तार से भारत के LPG परिवहन नेटवर्क में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
