गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर बुधवार को रेलवे व्यवस्था से जुड़ी एक हैरान करने वाली घटना सामने आई। यहां वैशाली एक्सप्रेस के गार्ड को गार्ड यान में बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध नहीं मिली। इसके बाद ट्रेन को आगे रवाना करने के बजाय प्लेटफॉर्म पर ही खड़ा रखा गया। करीब 38 मिनट तक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही, जिसके कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और रेल परिचालन भी प्रभावित हुआ
चार्ज लेने के बाद सामने आई समस्या
जानकारी के मुताबिक, वैशाली एक्सप्रेस के गार्ड ने जब ट्रेन का चार्ज लिया तो गार्ड यान में बैठने के लिए निर्धारित कुर्सी मौजूद नहीं थी। गार्ड के लिए ट्रेन संचालन के दौरान गार्ड यान में बैठने की व्यवस्था होना जरूरी होती है। कुर्सी नहीं होने के कारण गार्ड ने ट्रेन को रवाना नहीं किया और वह प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी रही
इस दौरान ट्रेन के यात्री अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए इंतजार करते रहे। ट्रेन के निर्धारित समय पर रवाना नहीं होने से यात्रियों में असुविधा और नाराजगी की स्थिति बनी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि ट्रेन के रुकने की वजह कोई तकनीकी खराबी, सिग्नल या ट्रैक संबंधी समस्या नहीं बल्कि गार्ड यान में बैठने की मूलभूत सुविधा का उपलब्ध न होना बताई गई
पीछे आ रही ट्रेन पर भी पड़ा असर
वैशाली एक्सप्रेस के प्लेटफॉर्म पर खड़े रहने का असर सिर्फ इसी ट्रेन तक सीमित नहीं रहा। इसके कारण पीछे से आने वाली एक अन्य ट्रेन को भी रुकना पड़ा। इससे रेल यातायात का संचालन प्रभावित हुआ और यात्रियों को अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा।
रेलवे जैसे बड़े और व्यस्त नेटवर्क में किसी एक ट्रेन के लंबे समय तक रुकने से आगे-पीछे चलने वाली ट्रेनों की समय-सारिणी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि छोटी-सी व्यवस्था संबंधी कमी भी कई यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
रेलवे व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना रेलवे की व्यवस्थाओं और कर्मचारियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े करती है। ट्रेन के संचालन से पहले यह सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी होती है कि संबंधित स्टाफ के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों। अगर गार्ड यान में एक कुर्सी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, तो इससे व्यवस्थागत लापरवाही का संकेत मिलता है।
वैशाली एक्सप्रेस पूर्वोत्तर भारत और दिल्ली के बीच यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण ट्रेन है। इस रूट पर यात्रियों की संख्या अधिक रहती है और ट्रेन में सीटों की मांग भी काफी रहती है। ऐसे में ट्रेन के 38 मिनट तक प्लेटफॉर्म पर खड़े रहने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई।
यात्रियों ने जताई नाराजगी
ट्रेन के निर्धारित समय पर रवाना नहीं होने से यात्रियों को अपने आगे के सफर की चिंता सताने लगी। कई यात्रियों के लिए ट्रेन में देरी का मतलब आगे की कनेक्टिंग ट्रेन, बस या अन्य जरूरी काम प्रभावित होना भी हो सकता है।
फिलहाल इस घटना ने रेलवे में छोटी-छोटी व्यवस्थाओं की अहमियत को सामने ला दिया है। एक कुर्सी की उपलब्धता जैसी मामूली लगने वाली समस्या ने न केवल एक ट्रेन को 38 मिनट तक रोके रखा, बल्कि पीछे चल रही ट्रेन के संचालन को भी प्रभावित किया। घटना के बाद रेलवे व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करने और ऐसी स्थिति दोबारा न बनने के लिए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
