Sunday, September 13, 2026
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Home राजनीति40 करोड़ की कथित सुपारी से सियासी साजिश तक, ED की कार्रवाई से फिर चर्चा में आया YS विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड

40 करोड़ की कथित सुपारी से सियासी साजिश तक, ED की कार्रवाई से फिर चर्चा में आया YS विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड

by Sagar Sharma
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आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के चाचा और पूर्व मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की 2019 में हुई हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच के तहत हैदराबाद और कडप्पा में कई ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई में कडप्पा से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाई.एस. भास्कर रेड्डी से जुड़े परिसरों को भी शामिल किया गया। ED ने दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, 24 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी और दो लॉकर की चाबियां जब्त किए जाने की जानकारी दी है।

विवेकानंद रेड्डी की 15 मार्च 2019 को कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी गई थी। यह घटना आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनाव से कुछ ही सप्ताह पहले हुई थी, इसलिए शुरुआत से ही इस हत्याकांड का राजनीतिक असर बेहद गहरा रहा। विवेकानंद रेड्डी पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई और तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के चाचा थे।

इस मामले की जांच पहले आंध्र प्रदेश पुलिस की SIT ने की थी, लेकिन बाद में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर CBI ने जांच अपने हाथ में ली। CBI ने अपनी जांच में हत्या के पीछे कथित राजनीतिक मतभेदों और कडप्पा लोकसभा सीट से जुड़े विवाद को भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू माना। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि विवेकानंद रेड्डी को राजनीतिक रूप से एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि मामले में आरोपित पक्ष इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

हत्याकांड में 40 करोड़ रुपये की कथित ‘सुपारी’ का मुद्दा भी जांच के दौरान सामने आया था। CBI की अदालत में दी गई दलीलों और आरोपी से सरकारी गवाह बने शेख दस्तागिरी के बयान के आधार पर आरोप सामने आया था कि हत्या को अंजाम देने वालों के लिए 40 करोड़ रुपये की रकम का वादा किया गया था। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि हत्या की साजिश में शामिल लोगों को शुरुआती तौर पर रकम दी गई थी। हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसियों और गवाहों के बयानों पर आधारित हैं और इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

अब ED की जांच का फोकस इस कथित अपराध से जुड़े पैसों के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं पर है। रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने अगस्त 2025 में इस मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के लिए ECIR दर्ज किया था। ताजा तलाशी इसी वित्तीय जांच का हिस्सा बताई जा रही है।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर आंध्र प्रदेश की राजनीति में पुराने विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, हत्या और साजिश से जुड़े आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीथा रेड्डी की ओर से दायर आगे की CBI जांच और आरोपियों की जमानत से संबंधित याचिकाओं पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया था, क्योंकि CBI ने तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी दी थी।

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