Thursday, October 8, 2026
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E20 पेट्रोल से प्रति लीटर 30 रुपये तक की बचत का दावा, सरकार बोली- ब्लेंडिंग नहीं होती तो कीमत 125 रुपये तक पहुंच जाती

by Sagar Sharma
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केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए दावा किया है कि इस योजना की बदौलत देश में पेट्रोल की कीमतों पर बड़ा नियंत्रण रखा जा सका। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग लागू नहीं होती तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दिल्ली में पेट्रोल करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था। फिलहाल राजधानी में E20 पेट्रोल की कीमत लगभग 102 रुपये प्रति लीटर है।मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद एथेनॉल मिश्रण के कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा। सरकार का कहना है कि संकट के दौरान इस कार्यक्रम ने पेट्रोल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक की बचत कराने में अहम भूमिका निभाई।सरकार ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि एथेनॉल उत्पादन के लिए गरीबों के हिस्से का अनाज या भारतीय खाद्य निगम (FCI) का सब्सिडी वाला चावल इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि E20 कार्यक्रम के लिए एफसीआई के सब्सिडी वाले चावल का उपयोग नहीं किया जाता और खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।वहीं, सड़क परिवहन मंत्रालय ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), SIAM और इंडियन ऑयल के अध्ययन के अनुसार, E10 ईंधन के लिए बनी BS-III, BS-IV और BS-VI पेट्रोल गाड़ियों में E20 इस्तेमाल करने पर माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह प्रभाव सीमित है और वाहन की स्थिति व तकनीक पर निर्भर करता है।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 ईंधन को वैज्ञानिक परीक्षणों और चरणबद्ध प्रक्रिया के बाद लागू किया गया है। ईंधन प्रणाली, इंजन की मजबूती, ड्राइविंग क्षमता, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी और उत्सर्जन मानकों की विस्तृत जांच के बाद ही इसे मंजूरी दी गई।सरकार के मुताबिक, देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रही हैं। अब तक ऐसे किसी भी सत्यापित मामले की पुष्टि नहीं हुई है, जिसमें E20 ईंधन के कारण इंजन को नुकसान पहुंचा हो। इससे सरकार का दावा है कि यह ईंधन न केवल सुरक्षित है, बल्कि आयातित तेल पर निर्भरता कम करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो रहा है।

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