Saturday, September 12, 2026
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क्या पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल की होगी वापसी? सरकार को दी गई ये सलाह

by Sagar Sharma
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भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है. जहां सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, वहीं पुरानी गाड़ियों के मालिकों को इसके इस्तेमाल को लेकर कई तरह की चिंताएं हैं. अब मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पूजारी ने सरकार को एक अहम सुझाव दिया है. उन्होंने कहा है कि E20 के साथ पेट्रोल पंपों पर E10 जैसे कम एथेनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इससे खासकर पुराने दोपहिया वाहनों के मालिकों को राहत मिल सकती है. हालांकि, सरकार फिलहाल E10 या E0 पेट्रोल दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है.

पुरानी गाड़ियों के लिए क्यों उठी E10 की मांग?

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और आकाश पूजारी ने अपने लेख में बताया कि E20 पेट्रोल से सबसे ज्यादा चिंता उन पुराने वाहनों को लेकर है, जो BS4 से पहले तैयार किए गए थे. इनमें बड़ी संख्या में कार्बोरेटर वाले बाइक और स्कूटर शामिल हैं.

ऐसे वाहनों में इंजन तक पहुंचने वाले ईंधन और हवा का संतुलन आधुनिक गाड़ियों की तरह अपने आप एडजस्ट नहीं होता. E20 में एथेनॉल की मात्रा ज्यादा होने के कारण पुराने इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इसके अलावा पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाली रबर सील भी ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन के साथ लंबे समय तक इस्तेमाल में खराब हो सकती हैं.

रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन हो सकते हैं. ऐसे में इन सभी वाहनों को E20 के अनुकूल बनाना आसान और तुरंत पूरा होने वाला काम नहीं है. इसी वजह से कुछ समय के लिए E10 को विकल्प के तौर पर उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है.

E20 से माइलेज में कितनी कमी?

लेख में कहा गया है कि एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है. इसलिए इसमें एथेनॉल की मात्रा बढ़ने पर वाहन की माइलेज पर कुछ असर पड़ना स्वाभाविक है. अनुमान के मुताबिक E20 से ऊर्जा के स्तर पर करीब 6 से 7 प्रतिशत तक का अंतर हो सकता है.

हालांकि, इंटरनेट पर E20 के कारण माइलेज में 30 प्रतिशत तक गिरावट के दावों को लेखकों ने सही नहीं माना है. उनके मुताबिक एथेनॉल मिश्रण से कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जले हाइड्रोकार्बन जैसे कुछ प्रदूषक उत्सर्जन भी कम हो सकते हैं.

E10 को विकल्प बनाने से क्या फायदा?

लेखकों का मानना है कि जब तक पुराने वाहनों को E20 के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पेट्रोल पंपों पर E10 और E20 दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं. इससे पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी गाड़ी के अनुसार ईंधन चुनने की सुविधा मिलेगी.

हालांकि सरकार ने हाल में स्पष्ट किया था कि E0 या E10 जैसे कम एथेनॉल वाले पेट्रोल को दोबारा शुरू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है. देश में पिछले साल E20 को बड़े स्तर पर लागू किया गया था और अप्रैल से पेट्रोल पंपों पर इसी ग्रेड की उपलब्धता बढ़ी है.

ज्यादा एथेनॉल मिश्रण पर भी सवाल

नागेश्वरन और पूजारी ने E27 या E30 जैसे ज्यादा एथेनॉल मिश्रण को लेकर भी सावधानी बरतने की जरूरत बताई है. भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और E20 से तेल आयात में कुछ कमी आने की उम्मीद है. लेकिन एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए मक्का और अन्य अनाज की जरूरत भी बढ़ेगी.

मक्का भारत में एथेनॉल उत्पादन का बड़ा स्रोत है. इसकी बढ़ती मांग से जमीन और पानी पर दबाव बढ़ सकता है. साथ ही सोयाबीन, मूंगफली और सरसों जैसी तिलहन फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है.

सरकार के सामने क्या सुझाव?

लेखकों ने सुझाव दिया है कि सरकार फिलहाल E20 नीति को जारी रखते हुए पुरानी गाड़ियों के लिए E10 का विकल्प उपलब्ध कराने पर विचार करे. इसके साथ ही मक्का की कीमत, पानी के इस्तेमाल और खाद्य तेलों की आयात नीति की भी समीक्षा की जानी चाहिए.

उनका कहना है कि एथेनॉल नीति का फैसला केवल पेट्रोल और वाहनों को ध्यान में रखकर नहीं किया जाना चाहिए. इसमें किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा, जमीन और पानी जैसे मुद्दों को भी बराबर महत्व देना जरूरी है.

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