tभारत के हाईस्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ा है। दिल्ली से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस परियोजना के लिए ग्लोबल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी की है। इसके तहत हाईस्पीड रेल परियोजना के सिविल स्ट्रक्चर और डिजाइन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंसी एजेंसी का चयन किया जाएगा।
लखनऊ से वाराणसी और आगे सिलीगुड़ी तक जुड़ेगा नेटवर्क
प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली से लखनऊ होते हुए वाराणसी तक लगभग 756 किलोमीटर का हिस्सा शामिल होगा, जबकि दूसरे चरण में वाराणसी से सिलीगुड़ी तक करीब 744 किलोमीटर का मार्ग प्रस्तावित है। इस तरह पूरा कॉरिडोर लगभग 1,500 किलोमीटर लंबा होगा।
प्रस्तावित रूट में दिल्ली के सराय काले खां से शुरुआत के बाद नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही जैसे शहरों को जोड़ते हुए वाराणसी तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी देने की योजना है।
दिल्ली-लखनऊ का सफर करीब दो घंटे में
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यात्रा समय में संभावित कमी होगी। प्रस्तावित परिचालन व्यवस्था के अनुसार दिल्ली से लखनऊ की दूरी करीब 2 घंटे 12 मिनट में तय करने का लक्ष्य है। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होने का अनुमान है।
वहीं दिल्ली से पटना के बीच यात्रा का समय करीब 4 घंटे 41 मिनट बताया गया है। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों के बीच तेज रेल संपर्क विकसित होने की संभावना है। हालांकि ये यात्रा समय परियोजना के अंतिम डिजाइन, परिचालन व्यवस्था और भविष्य में स्वीकृत टाइमटेबल पर निर्भर करेंगे।
लखनऊ को बनाया जाएगा अहम जंक्शन
इस कॉरिडोर में लखनऊ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। प्रस्ताव के अनुसार लखनऊ को एक प्रमुख जंक्शन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां से अयोध्या को जोड़ने वाले हाईस्पीड रेल कनेक्शन की भी योजना बताई गई है। इससे लखनऊ केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हाईस्पीड रेल नेटवर्क के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
RFP में हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को करीब 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को ध्यान में रखते हुए डिजाइन करने की बात सामने आई है। प्रस्तावित कॉरिडोर डबल लाइन का होगा और इसमें पुल, सुरंग, स्टेशन, डिपो, एप्रोच लाइन तथा अन्य सिविल स्ट्रक्चर शामिल होंगे।स्टेशनों के प्लेटफॉर्म की लंबाई करीब 415 मीटर रखने की योजना बताई गई है। भूमिगत हिस्सों और सुरंगों को भी हाईस्पीड परिचालन की जरूरतों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा
कंसल्टेंसी एजेंसी करेगी डिजाइन और तकनीकी तैयारी
ग्लोबल RFP के जरिए चुनी जाने वाली कंसल्टेंसी एजेंसी को परियोजना के विभिन्न सिविल कार्यों की डिजाइन तैयार करने में भूमिका निभानी होगी। इसमें मुख्य रेल लाइन, नदी और अन्य क्रॉसिंग के पुल, स्टील ब्रिज, स्टेशन भवन, डिपो और सुरंगों से जुड़े डिजाइन शामिल हैं।सरकारी ई-टेंडर रिकॉर्ड में NHSRCL की 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाले भारत के हाईस्पीड रेल कार्यक्रम के सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन से संबंधित कंसल्टेंसी निविदा भी दर्ज है।
उत्तर भारत की कनेक्टिविटी में आएगा बड़ा बदलाव
दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर अभी प्रस्ताव और डिजाइन की प्रक्रिया में है, इसलिए इसके निर्माण और परिचालन की अंतिम समयसीमा को लेकर अभी कई चरण बाकी हैं। लेकिन RFP और सर्वे से जुड़े कदम यह संकेत देते हैं कि परियोजना की तकनीकी तैयारी आगे बढ़ रही है।यदि प्रस्तावित नेटवर्क निर्धारित योजना के अनुसार विकसित होता है, तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई बड़े शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। इससे लंबी दूरी की यात्रा, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए एक नया हाईस्पीड विकल्प तैयार होगा।
