Wednesday, October 28, 2026
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विदेशी फंडिंग के आरोप पर आमने-सामने आए अभिजीत दिपके और मैरी मिलबेन, बोले- भारत के मामलों में दखल क्यों?

by Sagar Sharma
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अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच कथित विदेशी फंडिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। मिलबेन ने आरोप लगाया कि दिपके और उनके संगठन को अमेरिका में मौजूद ऐसे दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी हैं। इसके बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। दोनों के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई है, जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।

मैरी मिलबेन के आरोपों से शुरू हुआ विवाद

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके का नाम लिया। उन्होंने दावा किया कि संगठन को अमेरिका में रहने वाले ऐसे लोगों से आर्थिक सहायता मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व के विरोधी हैं।

मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील की कि वे इस मामले पर चुप न रहें और संगठन की विचारधारा के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि कुछ विदेशी दानदाता दुनिया के विभिन्न देशों में रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाते हैं और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, विदेशी फंडिंग से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें फिलहाल मिलबेन के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अभिजीत दिपके ने उठाया विदेशी हस्तक्षेप का सवाल

मैरी मिलबेन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं।

दिपके ने यह भी कहा कि भारत अपने आंतरिक मुद्दों को संभालने में सक्षम है और देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। उनके जवाब ने इस विवाद को केवल विदेशी फंडिंग के आरोपों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि राजनीतिक बहस में विदेशी नागरिकों की भागीदारी और उसकी सीमाओं का मुद्दा भी सामने ला दिया।

मोदी के समर्थन में मिलबेन ने दिया जवाब

दिपके की प्रतिक्रिया के बाद मैरी मिलबेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी समर्थन की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें भारत के नागरिकों का समर्थन प्राप्त है।

मिलबेन ने प्रधानमंत्री के लंबे राजनीतिक सफर और लगातार तीन लोकसभा चुनावों में उनकी जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका विश्वास भारतीय जनता के समर्थन पर आधारित है। उन्होंने दिपके को यह भी सलाह दी कि वे अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों के लिए करें।मिलबेन ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध और जवाबी आंदोलन की भूमिका हो सकती है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया।

मिलबेन ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध और जवाबी आंदोलन की भूमिका हो सकती है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया।

SIR विवाद से भी जुड़ा है राजनीतिक घटनाक्रम

यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक समूह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

विरोध करने वाले समूहों ने मतदाता सूची की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के अपने तर्क हैं। विदेशी फंडिंग को लेकर उठे नए आरोपों ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को एक और दिशा दे दी है।

विदेशी फंडिंग पर जांच और पारदर्शिता की मांग अहम

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी को वास्तव में विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही है। फिलहाल मिलबेन के आरोपों के आधार पर इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी संगठन की फंडिंग को लेकर निष्कर्ष निकालने के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और सक्षम प्राधिकरणों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

वहीं, भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों की टिप्पणी को लेकर दिपके की आपत्ति ने संप्रभुता और राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमाओं पर बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस विवाद का रुख दोनों पक्षों के अगले बयानों और विदेशी फंडिंग से जुड़े किसी सत्यापित तथ्य पर निर्भर करेगा।

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