वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर 2026: दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क एक बार फिर अमेरिकी राजनीति में अपने भारी-भरकम राजनीतिक चंदे को लेकर चर्चा में हैं। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने मस्क पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वह अपने धन के जरिए रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी संसद में मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। सैंडर्स ने धनकुबेरों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने की मांग की है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण बनाए रखना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी को कितना पैसा दिया?
उपलब्ध चुनावी वित्तपोषण संबंधी जानकारी के मुताबिक, मस्क ने जुलाई 2026 से अब तक रिपब्लिकन समर्थक राजनीतिक समूहों को लगभग 27.6 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 2,500 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है, हालांकि वास्तविक राशि विनिमय दर के अनुसार बदल सकती है।
2026 के चुनावी चक्र में मस्क का कुल राजनीतिक खर्च करीब 36.6 करोड़ डॉलर बताया गया है। यह रकम विभिन्न राजनीतिक कार्रवाई समितियों और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में खर्च की जा रही है।
इस धन का एक बड़ा हिस्सा सीनेट में रिपब्लिकन उम्मीदवारों की मदद करने वाले सीनेट लीडरशिप फंड को मिला है। इसके अलावा, मस्क से जुड़े अमेरिका पीएसी और प्रतिनिधि सभा के रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले समूहों को भी बड़ी रकम दी गई है।
इन योगदानों से रिपब्लिकन उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार, मतदाताओं तक पहुंचने और प्रतिस्पर्धी चुनावी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने में आर्थिक मदद मिल सकती है।
बर्नी सैंडर्स क्यों भड़के?
अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स लंबे समय से राजनीति में अरबपतियों के प्रभाव और चुनावों में बड़े चंदे की भूमिका की आलोचना करते रहे हैं। इस बार उन्होंने मस्क के राजनीतिक खर्च को लेकर सवाल उठाया है।
सैंडर्स के मुताबिक, मस्क ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत में मदद करने के लिए लगभग 29 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। अब वह रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में नियंत्रण बनाए रखने में सहायता देने के लिए और बड़ी रकम लगा रहे हैं।
सैंडर्स ने सोशल मीडिया पर मस्क के राजनीतिक खर्च और उनकी संपत्ति में कथित भारी बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए धनकुबेरों के वर्चस्व को रोकने की मांग की। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में आम नागरिकों की आवाज और प्रभाव किसी एक अरबपति की आर्थिक ताकत के सामने कमजोर नहीं पड़ने चाहिए।
हालांकि, संपत्ति में बढ़ोतरी को लेकर सैंडर्स के बताए आंकड़े उनके दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित आर्थिक आंकड़ों के समान नहीं माना जाना चाहिए।
सुपर पीएसी क्या हैं और इन पर विवाद क्यों है?
अमेरिका में सुपर पीएसी ऐसी राजनीतिक कार्रवाई समितियां हैं, जो चुनावों को प्रभावित करने के लिए स्वतंत्र रूप से धन जुटा और खर्च कर सकती हैं। इन पर पारंपरिक राजनीतिक समितियों की तरह व्यक्तिगत योगदान की वही सीमा लागू नहीं होती, लेकिन इन्हें उम्मीदवारों के अभियान के साथ सीधे समन्वय करने पर कानूनी प्रतिबंधों का पालन करना होता है।
आलोचकों का कहना है कि अरबपति इन समितियों के माध्यम से चुनाव प्रचार पर असाधारण प्रभाव डाल सकते हैं। इससे राजनीतिक मुकाबले में आर्थिक असमानता बढ़ने और नीतिगत फैसलों पर बड़े दानदाताओं का प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा होती है।
सैंडर्स इसी व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं। उन्होंने बड़े राजनीतिक चंदे पर रोक लगाने और चुनावी प्रक्रिया में आम लोगों की भूमिका मजबूत करने की मांग का समर्थन किया है।
