मध्य प्रदेश के रीवा संभाग के मऊगंज इलाके में पिछले दिनों वन विभाग के सामने एक चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया। साथी हाथी की करंट लगने से मौत के बाद अकेला रह गया हाथी ‘भरत’ लंबे समय तक इलाके में घूमता रहा। उसे सुरक्षित पकड़कर बांधवगढ़ ले जाने के लिए वन विभाग ने विशेषज्ञों और प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली। करीब 48 घंटे तक चले प्रयासों के बाद आखिरकार भरत का सफल रेस्क्यू किया गया।
साथी की मौत के बाद अकेला रह गया था भरत
भरत और उसका साथी पिछले कई महीनों से मऊगंज, रीवा और आसपास के जंगलों में विचरण कर रहे थे। मलकपुर क्षेत्र में बिजली के तारों की चपेट में आने से एक नर हाथी की मौत हो गई। इस घटना के बाद भरत अकेला रह गया।
घटना के बाद भरत कई बार अपने मृत साथी के आसपास पहुंचा। वह रात के समय भी घटनास्थल के आसपास घूमता रहा और इसके बाद तुर्रा फॉल की दिशा में चला गया। इस व्यवहार ने वन विभाग के सामने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसके प्राकृतिक और सुरक्षित आवास तक पहुंचाने की चुनौती बढ़ा दी।
रेस्क्यू के लिए बांधवगढ़ और संजय से पहुंची टीम
भरत को पकड़ने के लिए वन विभाग ने सामान्य तरीके के बजाय प्रशिक्षित हाथियों की मदद लेने की योजना बनाई। पहले बांधवगढ़ से रामा और सूर्या नाम के प्रशिक्षित हाथियों को लाया गया। बाद में संजय टाइगर रिजर्व से चित्रा और बापू को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल किया गया।
इन चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद का उद्देश्य भरत को नियंत्रित क्षेत्र की ओर ले जाना और रेस्क्यू टीम के लिए सुरक्षित परिस्थिति तैयार करना था। वन विभाग के लिए यह ऑपरेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि जंगली हाथी के व्यवहार का अनुमान लगाना आसान नहीं होता और किसी भी जल्दबाजी से हाथी या आसपास मौजूद लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता था।
48 घंटे तक चलती रही निगरानी
भरत को पकड़ने से पहले उसकी गतिविधियों और लोकेशन पर लगातार नजर रखी गई। टीम ने उसके मूवमेंट को समझने के बाद रेस्क्यू की रणनीति तैयार की। हाथी को अचानक घेरने के बजाय उसके व्यवहार और दिशा को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन आगे बढ़ाया गया।रेस्क्यू के दौरान वन विभाग के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता भरत को किसी तरह की चोट से बचाना और उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना था। इसी वजह से विशेषज्ञ टीम ने धैर्य के साथ ऑपरेशन को आगे बढ़ाया।
अब बांधवगढ़ में रहेगा भरत
सफल रेस्क्यू के बाद भरत को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाने की प्रक्रिया पूरी की गई। उसका स्थानांतरण इसलिए किया गया ताकि वह सुरक्षित वातावरण में रह सके और दोबारा आबादी वाले इलाकों में पहुंचने का जोखिम कम हो।
रीवा और मऊगंज क्षेत्र में पिछले कुछ समय से जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार वन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। पहले भी बांधवगढ़ और आसपास के इलाकों से निकलकर हाथियों के दूसरे क्षेत्रों में पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में भरत का सुरक्षित रेस्क्यू वन्यजीव प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भरत के रेस्क्यू ने यह भी दिखाया कि जंगली हाथियों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और स्थानांतरित करने के लिए प्रशिक्षित टीम, सही रणनीति और धैर्य कितना जरूरी होता है। करीब दो दिनों की लगातार कोशिश के बाद भरत को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना इस पूरे अभियान का अहम परिणाम रहा।
