Thursday, October 8, 2026
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हरित विकास की ओर भारत की तेज रफ्तार, पर्यावरण संरक्षण में पीएम मोदी ने गिनाईं बड़ी पहल

by Sagar Sharma
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की पर्यावरणीय पहलों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और हाइड्रोजन आधारित परिवहन जैसी पहलों का जिक्र किया।

जलवायु परिवर्तन से निपटने पर जोर

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए सभी देशों को अपनी जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने भारत के प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन और विकसित देशों के बीच अंतर का भी उल्लेख किया।

उनके मुताबिक, विकासशील देशों की विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलवायु नीतियां तैयार करना जरूरी है। भारत लगातार ऐसी व्यवस्था पर जोर देता रहा है जिसमें आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

सौर ऊर्जा को मिल रहा बढ़ावा

भारत में अक्षय ऊर्जा के विस्तार को लेकर प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा का विशेष रूप से उल्लेख किया। रूफटॉप सोलर के माध्यम से घरों को बिजली उत्पादन की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना जैसी पहल के जरिए घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे घरेलू स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने और बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

हाइड्रोजन ट्रेन का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की चर्चा करते हुए भारत की हाइड्रोजन ट्रेन का भी उल्लेख किया। हाइड्रोजन आधारित ट्रेन तकनीक को रेलवे में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हाइड्रोजन ईंधन का इस्तेमाल पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद कर सकता है। भारत में इस तकनीक के विकास को स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में तकनीकी क्षमता बढ़ाने से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों और मेट्रो पर बढ़ा फोकस

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के प्रयास भी जारी हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की संभावना है।

इसके साथ ही कई शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

कचरे को संसाधन में बदलने की कोशिश

पर्यावरण संरक्षण के तहत कचरा प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण विषय बताया गया। प्लास्टिक कचरे और सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा के तहत कचरे को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उससे उपयोगी संसाधन और आर्थिक मूल्य तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रिसाइक्लिंग और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की जरूरत है

जल संरक्षण और जैव विविधता पर भी ध्यान

पर्यावरण संरक्षण की चर्चा में जल संरक्षण और जैव विविधता भी अहम विषय रहे। नदियों, जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को टिकाऊ विकास के लिए जरूरी माना गया।भारत में पर्यावरणीय नीतियों के तहत प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की विभिन्न पहलों को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में भी रखा। उनका कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।सौर ऊर्जा से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन आधारित परिवहन तक, स्वच्छ तकनीकों का विस्तार आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रह सकता है। सम्मेलन के जरिए जलवायु परिवर्तन, टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा भी हुई।

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