Friday, October 9, 2026
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शादी की तैयारियों के बीच सामने आई हत्या की साजिश, युवराज हत्याकांड में खुलीं कई परतें

by Sagar Sharma
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दिल्ली के 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। युवराज के अचानक लापता होने के बाद परिवार ने उनकी तलाश शुरू की थी। जांच आगे बढ़ने पर उनकी पूर्व सहयोगी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा का नाम सामने आया। दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

गुरुग्राम जाने के बाद गायब हुए युवराज

बताया गया है कि युवराज 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ लाजपत नगर में थे। इसके बाद उन्होंने गुरुग्राम में एक मीटिंग के लिए जाने की बात कही थी। देर रात तक वापस नहीं लौटने और मोबाइल फोन बंद होने के बाद परिवार को चिंता हुई। बाद में उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई।पुलिस ने युवराज के मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान उनकी पूर्व ऑफिस सहयोगी आन्या वत्स तक पुलिस की जांच पहुंची।

मुलाकात के बाद सामने आया विवाद

जांच के अनुसार, युवराज और आन्या के बीच गुरुग्राम में मुलाकात हुई थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी विवाद के बाद युवराज की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

इस मामले में आन्या वत्स के साथ संयम सचदेवा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर हत्या के पीछे की पूरी वजह और घटनाक्रम का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

कार में शव रखने का मामला

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद युवराज के शव को कार में रखा गया था। इसके बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए जगह तलाशने की कोशिश की।शव को बाद में गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक नाले में फेंके जाने की जानकारी सामने आई। 10 सितंबर को वहां एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। बाद में उसकी पहचान युवराज के रूप में की गई।

शव को कार में कितने समय तक रखा गया, इसको लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। इसलिए इस अवधि की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

फोन के जरिए परिवार को भ्रम में रखने का आरोप

युवराज के लापता होने के बाद उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी किया गया। जांच में आरोप है कि फोन के जरिए परिवार को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि युवराज जल्द वापस लौट आएंगे।परिजनों को संदेश भेजे जाने की बात भी सामने आई है। इससे परिवार को कुछ समय तक युवराज के सुरक्षित होने का भ्रम बना रहा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फोन का इस्तेमाल किसने किया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।

उत्तराखंड से पकड़े गए आरोपी

पुलिस ने युवराज की तलाश के दौरान तकनीकी जांच का सहारा लिया। कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल जानकारी के आधार पर आन्या के नए मोबाइल नंबर का पता लगाया गया। उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची।इसके बाद आन्या वत्स और संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया। दोनों से पूछताछ में हत्या, शव को ठिकाने लगाने और युवराज के मोबाइल के इस्तेमाल से जुड़े सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

हत्या की वजह पर जांच अभी जारी

पुलिस की शुरुआती जांच में पैसों के लेन-देन से जुड़ा विवाद प्रमुख एंगल के तौर पर सामने आया है। वहीं, मामले से जुड़े कुछ दावों में ब्लैकमेल का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, हत्या की अंतिम वजह और पूरी साजिश को लेकर जांच अभी जारी है।

पुलिस बैंक लेन-देन, मोबाइल रिकॉर्ड, कार की गतिविधियों और आरोपियों के आपसी संबंधों समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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