दिल्ली: भारत और मालदीव के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर काफी चर्चा हुई थी। हालांकि, अब मुइज्जू के बयानों में भारत के प्रति एक अलग रुख दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में उन्होंने भारत के सहयोग और दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी की खुलकर सराहना की है।
थिलामाले ब्रिज को बताया भारत-मालदीव दोस्ती का प्रतीक
30 अगस्त 2026 को मुइज्जू ने थिलामाले ब्रिज का जिक्र करते हुए इसे मालदीव और भारत के बीच मजबूत तथा लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का प्रतीक बताया। यह परियोजना ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके जरिए माले, विलिमाले, गुलहिफाल्हू और थिलाफुशी को बेहतर तरीके से जोड़ा जा रहा है।
मुइज्जू ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और भारतीय उच्चायुक्त के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की तकनीकी टीमों के प्रयासों से यह महत्वपूर्ण उपलब्धि संभव हो पाई है।
भारत के सहयोग से कई बड़े प्रोजेक्ट
मालदीव के विकास में भारत लंबे समय से अहम भूमिका निभाता रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे, आवास और आर्थिक सहायता जैसे कई क्षेत्रों में भारत ने मालदीव को सहयोग दिया है। मुइज्जू भी अलग-अलग मौकों पर भारत के इस योगदान को स्वीकार कर चुके हैं।
2025 में भारत यात्रा के दौरान मुइज्जू ने भारत को मालदीव का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए आर्थिक चुनौतियों के दौरान मिले सहयोग की सराहना की थी। उन्होंने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा और अन्य आर्थिक मदद का भी उल्लेख किया था।
आर्थिक जरूरतों ने भी बढ़ाई भारत की अहमियत
मालदीव की अर्थव्यवस्था के लिए भारत केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण विकास और आर्थिक साझेदार है। भारत से मिलने वाली सहायता के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी गहरे संबंध हैं।
मुइज्जू ने पहले भी स्वीकार किया है कि बड़ी संख्या में मालदीव के नागरिक इलाज, शिक्षा और कारोबार के लिए भारत आते हैं। वहीं भारतीय पर्यटक भी मालदीव के पर्यटन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बाजार हैं।
अब रिश्तों को मजबूत करने पर जोर
15 अगस्त 2026 को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी मुइज्जू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की सराहना की तथा मालदीव के विकास में भारत के निरंतर सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इससे साफ है कि भारत-मालदीव संबंध अब व्यावहारिक सहयोग और साझा हितों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुइज्जू की मौजूदा बयानबाजी में भारत को लेकर सकारात्मकता पहले की तुलना में काफी स्पष्ट दिखाई देती है।
‘इंडिया आउट’ से साझेदारी तक कैसे बदला रुख?
मुइज्जू के राजनीतिक सफर में भारत को लेकर सख्त रुख चर्चा में रहा है। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद मालदीव की आर्थिक और विकास संबंधी जरूरतों ने भारत के साथ सहयोग की व्यावहारिक अहमियत को सामने रखा। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, आर्थिक सहयोग, स्वास्थ्य सेवाएं और पर्यटन जैसे क्षेत्र दोनों देशों को करीब लाते हैं।
इसलिए मौजूदा स्थिति को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बदलाव के तौर पर देखने के बजाय भारत-मालदीव संबंधों की व्यावहारिक जरूरतों के संदर्भ में भी समझा जा सकता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय सहयोग में और प्रगति देखने को मिल सकती है।
