पंजाब में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को सिख कैदियों यानी ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई की मांग को लेकर राज्यव्यापी बंद का असर देखने को मिला। कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से बुलाए गए इस बंद का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया। बंद के दौरान कई इलाकों में बाजार, दुकानें और परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है, जिनके बारे में उसका दावा है कि वे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं या रिहाई के लिए पात्र होने के बावजूद लंबे समय से जेलों में बंद हैं। मोर्चे का कहना है कि ‘बंदी सिंहों’ के मुद्दे पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। यह मांग पिछले कई वर्षों से पंजाब में एक संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
बंद के दौरान निजी स्कूलों को भी बंद रखने का फैसला किया गया। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन ऑफ पंजाब ने छात्र सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 21 अगस्त को छुट्टी घोषित की। इस संगठन से राज्य के हजारों निजी स्कूल जुड़े हैं। वहीं, पंजाब यूनिवर्सिटी ने भी कुछ निर्धारित परीक्षाओं को स्थगित किया और उन्हें बाद की तारीख पर आयोजित करने का फैसला किया।
हालांकि, सरकारी शिक्षण संस्थानों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में स्थिति अलग रही और कई सरकारी संस्थान खुले रहने की जानकारी सामने आई। इसलिए अभिभावकों और छात्रों के लिए अपने स्थानीय स्कूल या संस्थान से जानकारी लेना महत्वपूर्ण रहा।
बंद को कई सिख संगठनों, किसान संगठनों और अन्य सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भी बंद का समर्थन करते हुए अपने कार्यालयों और संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया। SGPC की निर्धारित बैठक को भी आगे के लिए टाल दिया गया। कुछ राजनीतिक संगठनों और किसान नेताओं ने भी लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील की।
इस बंद के बीच सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रही। चंडीगढ़-मोहाली सीमा समेत कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। इससे पहले 15 अगस्त को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन चुकी थी, जिसके बाद प्रशासन ने 21 अगस्त के बंद को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए।
मोर्चे ने बंद के दौरान जरूरी और आपातकालीन सेवाओं को छूट देने की बात कही। हालांकि, बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ने की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर दुकानें बंद रहीं और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
‘बंदी सिंहों’ का मुद्दा पंजाब की राजनीति और सिख समुदाय में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। समर्थकों का कहना है कि जिन कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उनके मामलों पर मानवीय और कानूनी आधार पर विचार होना चाहिए। दूसरी ओर, कैदियों से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाता है।
फिलहाल 21 अगस्त का पंजाब बंद इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ले आया है। बंद के जरिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने और लंबे समय से लंबित मामलों में कार्रवाई की मांग की है। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित पक्षों के रुख से यह तय होगा कि इस आंदोलन का अगला चरण क्या होगा।
