Sunday, September 13, 2026
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कोरोना के बाद कैंसर के खिलाफ mRNA वैक्सीन की बड़ी कामयाबी, क्यों गेम चेंजर मानी जा रही?

by Sagar Sharma
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कैंसर के इलाज में mRNA तकनीक एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना और दवा कंपनी मर्क की पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन ने गंभीर त्वचा कैंसर यानी मेलानोमा के मरीजों पर किए गए फेज-3 ट्रायल में सकारात्मक नतीजे दिखाए हैं। इस वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह सभी मरीजों के लिए एक जैसी नहीं होगी। इसे मरीज के ट्यूमर में मौजूद खास आनुवंशिक बदलावों को देखकर तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य शरीर की इम्यूनिटी को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करना और उन्हें खत्म करने के लिए तैयार करना है। यही वजह है कि इसे कैंसर के इलाज में संभावित गेम चेंजर माना जा रहा है।

मरीज के हिसाब से तैयार होगी वैक्सीन

मॉडर्ना और मर्क की यह वैक्सीन पारंपरिक वैक्सीन से काफी अलग है। डॉक्टर पहले मरीज के ट्यूमर की जेनेटिक जांच करते हैं। इसमें कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास बदलावों की पहचान की जाती है। इसके बाद AI की मदद से उन बदलावों को चुना जाता है, जिन्हें निशाना बनाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इन्हें नियोएंटीजन कहा जाता है।

इस तकनीक का मकसद शरीर की टी-कोशिकाओं को कैंसर की खास पहचान बताना है। इसके बाद इम्यून सिस्टम ऐसी कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए तैयार हो सकता है। एक वैक्सीन में मरीज के कैंसर से जुड़े 34 तक नियोएंटीजन शामिल किए जा सकते हैं।

फेज-3 ट्रायल में क्या मिला?

INTerpath-001 नाम के फेज-3 परीक्षण में 1,137 ऐसे मरीज शामिल हुए, जिनका गंभीर मेलानोमा सर्जरी के जरिए निकाला जा चुका था। परीक्षण में वैक्सीन को मर्क की इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा के साथ दिया गया। इसकी तुलना केवल कीट्रूडा लेने वाले मरीजों से की गई।

कंपनियों के अनुसार, वैक्सीन और कीट्रूडा के संयोजन से कैंसर के दोबारा लौटने और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के जोखिम को कम करने में बेहतर परिणाम मिले। खासतौर पर उन मरीजों में भी उम्मीद दिखी, जिनका कैंसर गहराई तक पहुंच चुका था या लिम्फ नोड्स तक फैल गया था।

क्यों कहा जा रहा है गेम चेंजर?

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्सनलाइज्ड होना है। यानी इलाज मरीज के कैंसर की विशेषता के अनुसार तैयार किया जा सकता है। यह कैंसर के इलाज को ज्यादा व्यक्तिगत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कोविड-19 के दौरान mRNA तकनीक ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। अब इसी तकनीक का इस्तेमाल कैंसर के खिलाफ इम्यून सिस्टम को तैयार करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, इसे अभी कैंसर का पक्का इलाज कहना जल्दबाजी होगी।

फेज-3 के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन पूरी जानकारी और लंबे समय तक मरीजों पर इसके असर का आकलन अभी जरूरी है। इसके बाद ही नियामक एजेंसियां इसके इस्तेमाल को मंजूरी देने पर फैसला करेंगी।

कीट्रूडा के साथ कैसे काम करती है?

इस उपचार में दोनों दवाओं की भूमिका अलग-अलग है। कैंसर वैक्सीन शरीर को कैंसर की पहचान करने में मदद करती है, जबकि कीट्रूडा इम्यून सिस्टम को कैंसर के खिलाफ ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करने में मदद करती है। इस तरह दोनों के संयोजन से कैंसर पर दो तरफ से हमला करने की कोशिश की जाती है

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