अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों भारत की चुनावी व्यवस्था का जिक्र करते हुए अमेरिका में भी वोटर लिस्ट की जांच और सत्यापन की बात कर रहे हैं. भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जिस तरह चर्चा होती है, उसी तरह अमेरिका में भी वोटर रिकॉर्ड की जांच का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है. ट्रंप ने दावा किया है कि रिकॉर्ड की जांच में हजारों ऐसे लोगों के नाम सामने आए, जो उनके मुताबिक अमेरिकी नागरिक नहीं हैं. अब वह चुनावी प्रक्रिया को और सख्त बनाने के लिए नए कानून की मांग कर रहे हैं. खास बात यह है कि नवंबर 2026 में अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव होने हैं.
ट्रंप क्यों उठा रहे हैं वोटर लिस्ट का मुद्दा?
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची की सटीकता बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता से जुड़े आंकड़ों की जांच की जानी चाहिए, ताकि गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी आंकड़ों के शुरुआती मिलान में करीब 12.8 करोड़ रिकॉर्ड की जांच की गई. उनके अनुसार इस प्रक्रिया में 24 हजार से ज्यादा ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई, जिन्हें उन्होंने गैर-नागरिक बताया. उन्होंने संकेत दिया कि बाकी रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है.
भारत के SIR से क्यों जोड़ा जा रहा है?
भारत में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है. इसी वजह से अमेरिका में ट्रंप की मांग की तुलना भारत की प्रक्रिया से की जा रही है. हालांकि दोनों देशों की चुनावी व्यवस्था और कानूनी ढांचा अलग है, लेकिन दोनों जगह मतदाता सूची की शुद्धता और सत्यापन का मुद्दा राजनीतिक बहस में है.
ट्रंप पहले भी भारत की फोटो पहचान आधारित चुनावी व्यवस्था की तारीफ कर चुके हैं. उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर भी भारतीय चुनाव व्यवस्था का उल्लेख किया था.
मिड-टर्म चुनाव से पहले क्यों बढ़ी हलचल?
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड-टर्म चुनाव होने हैं. ऐसे में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी अहम हो जाता है. ट्रंप का तर्क है कि चुनाव में केवल योग्य अमेरिकी नागरिकों को ही मतदान का अधिकार मिलना चाहिए.
उन्होंने चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को रोकने के लिए नए कानून की जरूरत बताई है. उनके बयानों में फर्जी वोटर, वोट की शुद्धता, पहचान सत्यापन और गैर-कानूनी मतदान जैसे मुद्दे प्रमुख हैं.
हालांकि ट्रंप द्वारा बताए गए आंकड़ों और दावों की पुष्टि तथा उनकी व्यापकता अलग-अलग राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय है. फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच का मुद्दा 2026 के मिड-टर्म चुनाव से पहले तेजी से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है.
