सरकारी दफ्तरों में रिश्वत मांगने के आरोपों को सामने लाने के लिए शुरू की गई एक वेबसाइट इन दिनों तेजी से चर्चा में है। Bribes.fyi नाम के इस क्राउडसोर्स्ड प्लेटफॉर्म पर लोग गुमनाम तरीके से उन घटनाओं की जानकारी साझा कर सकते हैं, जब उनसे किसी सरकारी काम के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगी गई। इस प्लेटफॉर्म को दिल्ली के महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बीटेक छात्र आर्यन निषाद ने तैयार किया है।
क्या है Bribes.fyi?
Bribes.fyi का मकसद रिश्वतखोरी से जुड़े व्यक्तिगत अनुभवों को एक जगह इकट्ठा करके उन्हें सार्वजनिक डेटा के रूप में दिखाना है। वेबसाइट पर कोई भी व्यक्ति बता सकता है कि उससे किस विभाग में, किस काम के लिए और कितनी रकम की कथित तौर पर मांग की गई। यूजर यह भी बता सकता है कि उसने रिश्वत दी या देने से इनकार कर दिया।
प्लेटफॉर्म के अनुसार, रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया करीब एक मिनट में पूरी की जा सकती है। इसमें विभाग, शहर, रकम और रिश्वत मांगने का उद्देश्य जैसी जानकारी ली जाती है। रिपोर्ट को पहचान संबंधी जानकारी हटाकर डेटाबेस में शामिल किया जाता है।
पुलिस से लेकर RTO तक की शिकायतें
Bribes.fyi पर दर्ज रिपोर्टों को विभाग, शहर और राज्य के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 17 अगस्त तक प्लेटफॉर्म पर 253 शहरों से 617 शिकायतें दर्ज की गई थीं। इनमें सबसे ज्यादा 336 मामले पुलिस विभाग से जुड़े बताए गए। इसके बाद RTO, राजस्व, पासपोर्ट और नगर निगम जैसे विभागों से संबंधित शिकायतें सामने आईं।
दिलचस्प बात यह है कि प्लेटफॉर्म पर दर्ज आंकड़ों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी बताई गई, जिन्होंने कथित रिश्वत देने से इनकार किया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 37 प्रतिशत लोगों ने रिश्वत देने से मना किया और फिर भी उनका काम पूरा हो गया। हालांकि, इन आंकड़ों को पूरे देश में भ्रष्टाचार की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
अचानक क्यों चर्चा में आया Bribes.fyi?
Bribes.fyi के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेजी से बढ़ी। प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि वेबसाइट को भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ा। टीम से जुड़े एक इंजीनियर के मुताबिक, वेबसाइट पर 48 घंटे में 50 लाख से ज्यादा रिक्वेस्ट और करीब 2 लाख नए यूजर्स आए। इसके बाद प्लेटफॉर्म ने अस्थायी रूप से नई रिपोर्ट स्वीकार करना और पुराने पोस्ट दिखाना रोक दिया।
टीम ने बताया कि वह वेबसाइट को लंबे समय तक चलाने के लिए कानूनी और वित्तीय ढांचे की समीक्षा कर रही है। इसी वजह से फिलहाल प्लेटफॉर्म की सेवाओं पर रोक लगाई गई है।
क्या Bribes.fyi की रिपोर्ट कानूनी सबूत है?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Bribes.fyi पर मौजूद शिकायतों को सत्यापित सरकारी रिकॉर्ड या अदालत द्वारा प्रमाणित मामले नहीं माना जा सकता। वेबसाइट खुद भी इस संबंध में डिस्क्लेमर देती है। प्लेटफॉर्म पर मौजूद जानकारी उन लोगों के दावों पर आधारित है, जिन्होंने अपनी कथित घटनाएं साझा की हैं।
इसलिए किसी व्यक्ति या सरकारी कर्मचारी पर केवल वेबसाइट पर दर्ज शिकायत के आधार पर रिश्वत लेने का आरोप साबित नहीं माना जा सकता। इसका उद्देश्य शिकायतों को एक जगह इकट्ठा करके कथित भ्रष्टाचार के पैटर्न को समझने में मदद करना है।
बीटेक छात्र की पहल ने छेड़ी बड़ी बहस
Bribes.fyi की लोकप्रियता ने यह दिखाया है कि आम लोग सरकारी सेवाओं से जुड़े अपने अनुभवों को सार्वजनिक करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहते हैं। एक छात्र द्वारा तैयार किया गया यह प्लेटफॉर्म अब भ्रष्टाचार, पारदर्शिता और नागरिक भागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए शिकायतों की सत्यता, कानूनी सुरक्षा और डेटा की विश्वसनीयता बड़ी चुनौतियां हैं। अगर Bribes.fyi इन पहलुओं को मजबूत तरीके से संभाल पाता है, तो यह भविष्य में नागरिकों द्वारा साझा किए गए भ्रष्टाचार संबंधी अनुभवों का एक उपयोगी डेटा प्लेटफॉर्म बन सकता है।
