HDFC Bank ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए ज्यादातर अवधि की MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) में 5 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। बैंक की संशोधित दरें 7 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। हालांकि, इस बदलाव का फायदा सभी लोन ग्राहकों को सीधे नहीं मिलेगा। इसका लाभ मुख्य रूप से उन्हीं कर्जदारों को होगा, जिनका फ्लोटिंग रेट लोन MCLR से जुड़ा हुआ है।
छह अवधि की MCLR हुई सस्ती
HDFC Bank ने सात में से छह टेन्योर की MCLR में 5 बेसिस पॉइंट की कमी की है। ओवरनाइट और 1 महीने की MCLR अब 8.00%, 3 महीने की 8.15%, 6 महीने की 8.30%, 1 साल की 8.40% और 3 साल की MCLR 8.65% हो गई है। वहीं, 2 साल की MCLR को 8.55% पर ही बरकरार रखा गया है।
5 बेसिस पॉइंट यानी 0.05 प्रतिशत की कमी होती है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ग्राहक की ब्याज दर या EMI भी तुरंत 0.05 प्रतिशत कम हो जाएगी।
पुराने MCLR लिंक्ड लोन वालों को राहत
HDFC Bank की इस कटौती का सबसे सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके पुराने फ्लोटिंग रेट लोन MCLR से जुड़े हैं। लेकिन ब्याज दर में बदलाव लोन की रीसेट डेट पर निर्भर करेगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ग्राहक का लोन 1 साल की MCLR से जुड़ा है और उसका बेंचमार्क 8.45% से घटकर 8.40% हो गया है, तो उसे 5 बेसिस पॉइंट की कमी का लाभ मिल सकता है। लेकिन यह लाभ तभी दिखाई देगा जब उसकी रीसेट तारीख आएगी।
सिर्फ MCLR नहीं, स्प्रेड भी जरूरी
लोन की अंतिम ब्याज दर केवल MCLR से तय नहीं होती। इसमें बैंक का स्प्रेड भी शामिल रहता है।
लोन ब्याज दर = MCLR + बैंक का स्प्रेड
इसलिए MCLR घटने के बावजूद आपकी वास्तविक ब्याज दर में उतनी ही कमी हो, यह जरूरी नहीं है।
EMI घटने से पहले ये 3 चीजें जांचें
अगर आपका लोन HDFC Bank से चल रहा है, तो सबसे पहले पता करें कि वह MCLR से लिंक है या किसी बाहरी बेंचमार्क से। इसके बाद अपने लोन का स्प्रेड और अगली रीसेट डेट जरूर चेक करें। नए रिटेल फ्लोटिंग रेट लोन आमतौर पर बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, इसलिए उन पर इस MCLR कटौती का सीधा असर नहीं पड़ सकता।
